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इस सिद्धपीठ में दीपावली की रात तंत्र साधना के लिए विदेशों से भी पहुंचते अघोरी

लाइव खगड़िया : अघोरपंथ साधना की एक रहस्यमयी शाखा है. जिसका अपना विधान, अपनी विधि एवं अपना एक अलग अंदाज होता है. अघोरपंथी साधक को ही अघोरी कहा जाता है. जिले का एक सिद्धपीठ अघोरियों की तंत्र साधना के लिए चर्चित रहा है और अघोरपंथ में यह स्थान देश-विदेशों में भी जाना जाता है. जहां दीपावली की रात साधना के लिए विदेशों से भी अघोरी पहुंचते रहे हैं.

शहर के बलुआही स्थित योगिराज डॉ रामनाथ अघोरी बाबा आश्रम में दीपावली की रात तंत्र साधना के लिए बीते वर्ष भूटान से भी अघोरी पहुंचे थे. साथ ही यहां नेपाल से भी अघोरी पहुंचते हैं. इस वर्ष भी अघोरियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है. बताया जाता है कि दूर-दूर से कई साधक अघोरी आश्रम में पहुंच चुके है और तंत्र साधना की तैयारी अंतिम चरण में है.

शहर के बूढ़ी गंडक के तट पर स्थित योगिराज डॉ रामनाथ अघोरी बाबा आश्रम में पचास वर्ष से भी अधिक समय से दीपावली की रात मां काली की पूजा विधि-विधान से होता आ रहा है. यहां काली पूजा के दौरान बलि प्रदान करने की भी परंपरा रही है. मान्यता है कि अघोरी स्थान सिद्धपीठ में सच्चे मन से जो भी श्रद्धालु मां काली से मन्नत मांगते हैं, उनकी मनोकामना पूर्ण होती है.

योगिराज डॉ रामनाथ अघोरी बाबा नेपाल के राजदरबार के राजपुरोहित थे. बताया जाता है कि जनकल्याण के लिए वे नेपाल राजदरबार को छोड़कर नाव से ही निकल गये और वे नाव पर ही काठ की मां काली की मूर्ति स्थापित कर सुबह-शाम मां की पूजा करते हुए आगे बढ़ने लगे. इसी दौरान एक दिन उनकी नाव जिले के बलुआही के पास बूढ़ी गंडक में रूक गई और वे नाव पर से ही वहां कई महीनों तक लोगों के दुख दर्द दूर करते रहे. बाद में मंदिर निर्माण के लिए उन्हें यह स्थान पसंद आ गया. जिसके उपरांत वे स्थानीय लोगों से जमीन दान में मांगकर मां काली की मंदिर का निर्माण कराये. साथ ही मां काली की प्रतिमा स्थापित किया गया और उस समय से ही यहां काली पूजा आरंभ हो गया.

बताया जाता है कि रामनाथ बाबा के द्वारा खगड़िया के अलावा देवघर, कोलकता के कालीघाट सहित देश मे कई स्थानों पर अघोरी स्थान का निर्माण कराया गया. साथ ही नेपाल के धरान व काठमांडू में भी मंदिर का निर्माण कराया गया. इन सभी जगहों पर आज भी दीपावली की रात तंत्र साधना के लिए अघोरी पहुंचते हैं. अघोरी स्थान में मां काली के अलावे मां दुर्गा की प्रतिमा, दक्षिण मुखी हनुमान आदि की मूर्तियां स्थापित हैं.

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