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गुरू पूर्णिमा विशेष : गुरू-शिष्य के मधुर मिलन का साक्षी बनेगा नवगछिया

खगडिया (मुकेश कुमार मिश्र) : पंचांग के अनुसार इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 27 जूलाई को मनाया जाएगा.जीवन में गुरु एवं शिष्य के महत्व को आने वाले पीढ़ी को बताने के लिए इस दिन को आदर्श दिन माना जाता है.कहा जाता है गुरु का आशीर्वाद सर्वाधिक कल्याणकारी व ज्ञानवर्धक होता हैं और यह महोत्सव व पर्व संस्कृत के प्रकांड विद्वान चारों वेदों के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी को समर्पित है.बताया जाता है कि वेद व्यास जी का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा के दिन हुआ था.उनके सम्मान में आषाढ़ माह  की  पूर्णिमा भारत में धूम-धाम से मनाया जाता है.आषाढ़ माह की पूर्णिमा को श्रीगुरु व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं.वहीं अंग की धरती पर अवतरण लिए परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज घर-घर में अध्यात्म का दीप जलाकर लोगों को भगवान नाम का रस पान करा रहे हैं.स्वामी जी आध्यात्मिक,धार्मिक,समाजिक कार्यों में लोगों को जोड़ कर सैकड़ों गांवों को एक सुन्दर सा परिवार बना दिए हैं.स्वामी जी द्वारा भागलपुर जिला के नवगछिया में श्री शिव शक्ति योग पीठ का निर्माण किया गया है.जिसमें लाखों की संख्या में लोग जुड़े हुए हैं.मदन अहल्या महिला महाविद्यालय नवगछिया के प्रागंण में कार्यक्रम का होगा आयोजन

विगत आठ वर्षों से श्री शिव शक्ति योग पीठ नवगछिया के द्वारा गुरु पूर्णिमा महोत्सव परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज के सानिध्य में मनामा जा रहा है.इस क्रम में इस वर्ष नौवां दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव 26 व 27 जूलाई को मदन अहल्या महिला महाविद्यालय के प्रागंण में मनाया जाएगा.जिसमें लगभग पच्चीस हजार की संख्या में भक्तगण के शामिल होनेे अनुमान है.जहां गुरु एवं शिष्य का अनुपम छटा देखने को मिलता है.जिसके मद्देनजर योग पीठ के द्वारा बेहतर व्यवस्था की जा रही है. इस क्रम में रंग-बिरंगे फूलों की पंखुड़ियों से मंच को सुसज्जित किया जाना है.वहीं संध्या के समय स्वामी जी अपने मुखारबिंद से शिष्यों को आशीर्वचन देंगे.गुरु पूर्णिमा के दिन नवगछिया  की धरती पर गुरु शिष्य मिलन का एक अद्भुत नजारा देखने को मिलता है.दिन भर संगीत कलाकार अपने भक्ति संगीत से लोगों को झूमने पर मजबूर कर देते हैं.

विभिन्न प्रदेशों के स्वामीजी के अनुयायियों की लगती है जमघट

बिहार के खगड़िया सहित विभिन्न जिला व अन्य प्रदेशों के स्वामी जी के अनुयायी इस अवसर पर यहां पहुंचकर आशीर्वाद लेते हैं.जिसमें रांची,दिल्ली,लखनऊ,कानपुर,वाराणसी,बेंगलुरु,चेन्नई ,हैदराबाद,मुम्बई,जम्मू कश्मीर,जबलपुर,इंदौर,असम,कलकत्ता आदि शहरों के स्वामी जी के अनुयायी गुरु पूर्णिमा के दिन शिरकत करते हैं.निराधार उपवास में  महिला एवं पुरुष कतारबद्ध होकर अपने बारी का इंतजार करते हैं.भक्तों के द्वारा रंग-बिरंगे फूल स्वामी जी के चरणों में अर्पित होता है.प्रसाद के रूप में मिठाईयों की थाल लिए लम्बी कतार लगती हा.गुरु पूर्णिमा के दिन स्वामी जी के भक्त रूपी परिवार एक-दूसरे से मिलकर आनंदित हो जाते हैं.जिसे परिवारों का संगम स्थल भी कहा जाता है.गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुजी से आशीर्वाद और प्रसाद ग्रहण कर ही भक्तगण उस दिन के उपवास को निस्तार करते हैं.जबकि शिव शक्ति योग पीठ के सैकड़ों सेवा दल अनुशासित होकर आए हुए अतिथियों के सत्कार में तत्पर रहते हैं.श्री शिव शक्ति योग पीठ आश्रम का मुख्य उद्देश्य धार्मिक कार्यों का आयोजन,मठ,मंदिर,धर्मशाला,गोशाला,विद्यालय,महाविद्यालय, अस्पताल निर्माण व प्राकृति आपदा के समय पीड़ितों की मदद,दिन-दुखियों व बच्चों की सर्वांगीण कल्याण बताया जाता है.वहीं स्वामी जी से गुरु दीक्षा भी लिया जाता है.

कहते हैं नवगछिया के पीठाधीश्वर परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज

श्री शिव शक्ति योग पीठ नवगछिया के पीठाधीश्वर परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज का कहना है कि  गुरु पूर्णिमा संयम,सेवा ,स्वाध्याय, सानिध्य ,समर्पण का पर्व है.मानव सेवा ही गुरु सेवा है.वहीं उन्होंने बताया कि संत शिरोमणी कबीर दास की दोहे में कहा गया है कि… ”कुम्हार शिष्य कुंभ है, गढि़ गढि़ काढ़ै खोट.अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट”…”गुरु धोबी सीख कपड़ा  साबून सिरजन हार.सुरती सिला पर धोईए नीक सत ज्ञान अपार”.जबकि तुलसी दास जी ने कहा है कि… “सूर्य गुरु पदनक मनगण ज्योति, सुमिरन दिव्य दृष्टि हीय होती”.

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