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टोपोलैंड के दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन पर लगी रोक हटी, परबत्ता विधायक ने सदन में उठाया था मुद्दा

लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : बिहार सरकार ने बीते कई सालों से टोपोलैंड (असर्वेक्षित) भूमि के रजिस्ट्री म्यूटेशन पर लगाये रोक को हटा लिया है. सरकार के इस फैसले के बाद अब टोपोलैंड की खरीद बिक्री का सिलसिला शुरू हो जाएगा. निबंधन विभाग ने इस संबंध में एक पत्र जारी करते हुए जिला समाहर्ता एवं निबंधन पदाधिकारी को निर्देशित कर दिया है. जिससे किसानों में भी खुशी देखी जा रही है.

बता दें कि परबत्ता विधायक डॉ संजीव कुमार ने सरकार गठन के बाद ही विधानसभा में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था और अब विधायक ने इस फैसले के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि इस मुद्दे को लेकर किसान लंबे अरसे से संघर्ष कर रहे थे और अब लाखों किसानों को सरकार के नये फैसले से फायदा होगा. बताया जाता है कि सदन में मुद्दा उठने के बाद तत्कालीन मंत्री रामसूरत राय ने इस मसले पर एक कमिटी गठित करने की बात कही थी. इधर कुछ किसान संगठन ने मामले को हाईकोर्ट में भी चुनौती दिया था. जिसके बाद सरकार ने वर्ष 2017 के आदेशों को निरस्त करते हुए नया आदेश जारी किया है. गौरतलब है कि टोपो लैंड जमीन की रजिस्ट्री शुरू हो जाने के बाद किसान अपनी जमीन की खरीद बिक्री आसानी से कर सकेंगे और सरकार को भी राजस्व का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त होगा.

इधर नवोदित किसान संघ ने इसे अपने लंबे संघर्ष की उपलब्धि बताया है. नवोदित किसान संघ के अध्यक्ष रामानुज रमन, सचिव मदन मोहन सिंह, जिला परिषद सदस्य जयप्रकाश यादव आदि ने राजस्व एवं बिहार सरकार के भूमि सुधार विभाग द्वारा रैयती जमीन को सरकारी जमीन मानकर रैयती हक छीनने के आदेश को निरस्त करने के फैसले को एक साहसिक एवं किसान हितैषी कदम बताया है. साथ ही किसान नेताओं ने गैरमजरूआ खास, बकाश्त, परती कदीम, गंगबरार कैसर-ऐ-हिंद आदि जैसी रैयती जमीन पर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है. साथ ही अंचल कार्यालय में किसानों के साथ हो रहे आर्थिक दोहन का भी मुद्दा उठाते हुए इस पर लगाम लगाने के लिए कारगर कदम उठाने की मांग की गई. वहीं बताया गया कि किसान संघ का विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष जारी रखेगा और सरकार के इस नए फैसले के बाद आगे की रणनीति के लिए जल्द ही किसानों एवं इससे जुड़े सदस्यों की बैठक बुलाई जाएगी.

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