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बस,वो घड़ी दगा दे गया वर्ना हिलने ही वाला था आतंक का साम्राज्य

लाइव खगड़िया : पुलिस और अपराधियों के बीच शुक्रवार की रात दियारा में हुए मुठभेड़ में पसराहा थानाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह के शहादत के बाद जिला पुलिस प्रशासन के कार्यशैली पर कई तरह के सवाल उठाये जा रहें हैं.हालांकि ऐसी उठती हर सवालों के बीच घटना के अगले ही दिन आयोजित प्रेस वार्ता में एडीजी एस.के.सिंगल ने कहा था कि सूचना मिलने के तुरंत बाद थानाध्यक्ष सहित उस वक्त की वहां उपलब्ध एक बेहतर टीम चिन्हित स्थल की ओर रवाना हुई थी.

ADG एस.के.सिंघल

वहीँ उन्होंने ऐसे मौके पर पुलिस की कार्यप्रणाली का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया था क़ि जब भी कहीं अपराधियों के जमाबड़ा की सूचना पुलिस को मिलती है तो तत्कालीन बेस्ट पॉसिबल उपलब्ध बल के साथ ही ऑपरेशन का निर्णय लिया जाता है.क्योंकि ऐसे नाजुक मौके पर महत्वपूर्ण सूचनाओं की पुष्टि व रणनीति तैयार करने का इंतजार नहीं किया जा सकता है और ऐसा ही प्रदेश की पुलिस,परा मिलेट्री पुलिस व पुलिस की संयुक्त टुकड़ियां आदि भी करती रही है.साथ ही मौके पर मौजूद थानाध्यक्ष द्वारा ही निर्णय लेकर छापेमारी को अंजाम दिया जाता है.यह पुलिस का हर रोज का क्रियाकलाप हैं जो की निरंतर चलता रहा है और पसराहा मामले में भी तत्काल उपलब्ध बेस्ट यूनिट के द्वारा छापेमारी को अंजाम दिया गया था.वहीँ उन्होंने छापेमारी टीम के बैकअप किये जाने संबधित सवाल पर कहा था कि घटना क्षणों की थी और आस-पास के थानों को सूचना दे दी गई थी.पांच थाने की पुलिस घटना स्थल की ओर कूच कर चुकी थी.लेकिन स्थानीय पुलिस द्वारा सूचना की पुष्टि के क्रम में ही घटना घट गई.

निश्चय ही एडीजी का यह बयान स्थिति को बहुत कुछ स्पष्ट कर देता है.हलांकि उस परिवार की भावनाओं को भी समझा जा सकता है जिन्होनें अपना बेटा,भाई,पिता व सुहाग खोया है.उनके मर्म को शब्दों में नहीं ढ़ाला जा सकता है.निश्चय ही यह भी एक सच्चाई है कि यदि विभाग द्वारा पूर्व से ही जिला पुलिस को अत्याधुनिक संसाधन उपलब्ध करा दी गई होती तो घटना की तस्वीर शायद दूसरी भी दिख सकती थी.बावजूद इसके सीमित संसाधन व बल के साथ ही शहीद ने आतंक के साम्राज्य को रात के अंधेरे में उन्हीं के मांद में घुसकर हिलाने की पटकथा तैयार कर ही डाली थी.बस वो मनहूस घड़ी ही दगा दे गया जिस वक्त जाबांज थानाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह को अपराधियों की गोली आ लगी.हालांकि बावजूद इसके अदम्य साहस का परिचय देते हुए वीर गति को प्राप्त होने के पूर्व जाबांज दारोगा की गोली से दियारा का आतंक कुख्यात दिनेश मुनि के भी घायल होने की खबर है.घटना के बाद से ही एसटीएफ व चीता फोर्स के साथ-साथ स्थानीय पुलिस दियारा में ऑपरेशन चला रही है और जिस तरह से सूबे के वरीय पुलिस अधिकारियों का बयान आ रहा है उसे सुनकर माना जा सकता है कि मुठभेड़ में जिले के एक वीर पुलिस पदाधिकारी की शहादत दियारा के आतंक के ताबूत की आखिरी कील साबित हो सकती है.

वैसे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति व मूलभूत सुविधाओं का अभाव पुलिस के लिए परेशानियों का सबब भी पैदा कर सकता है.लेकिन जिले के एक जाबांज दारोगा ने पुलिस की चंद टुकड़ियों के साथ रात के अंधेरे में ऐसे ही दुर्गम क्षेत्र में जो साहस दिखाई है वो पुलिसकर्मियों को प्रेरित भी करती रहेगी.बहरहाल कर्तव्य पथ पर पसराहा थानाध्यक्ष की शहादत पुलिस की वर्दी पर एक ऐसा सितारा जड़ गया है जिसकी चमक कभी फीकी नहीं हो सकती.संभव है कि उनकी शहादत से प्रेरणा लेकर आने वाले वक्त में जिले में पुलिसिंग का और भी बेहतर नजारा दिखे.

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