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भारतीय उपमहाद्वीप के 51 शक्ति पीठों में से एक मां कात्यायनी मंदिर

लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर की दूरी पर चौथम प्रखंड के रोहियार पंचायत के धमहरा घाट रेल स्टेशन के समीप बंगलिया गांव स्थित मां कात्यायनी मंदिर दुर्गा के छठे स्वरूप के नाम से विख्यात है.कोसी व बागमती नदी के बीच अवस्थित शक्ति पीठ मां कात्यायनी स्थान की महिमा अगम अपार है.कहा जाता है कि माता भक्तजनों की मन्नतें पूर्ण करती हैं.शायद यही कारण रहा है कि नवरात्र सहित वर्ष के हर सोमवार व शुक्रवार को मां के दरबार में भक्तजनों की भीड़ उमड़ पड़ती है.

प्रचलित कथा के अनुसार चौथम के राजा मंगल सिंह एवं सिरपत महाराज दोनों मित्र थे.कहा जाता है सिरपत महाराज हजारों पशुओं का मालिक थे.एक दिन गाय चराने के क्रम में वर्तमान मंदिर स्थल पर गाय स्वतः दूध स्राव करने लगी. जिसे देखकर सिरपत महाराज को आश्चर्य हुआ और यह बात कानों कान क्षेत्र में फैल गई.इसी बीच चौथम के राजा मंगल सिंह को माँ ने स्वप्न दिया और दोनों मित्र ने उक्त स्थल पर खुदाई करवाई.इस क्रम में वहां माता का बायां हाथ मिला.जिसके उपरांत सन् 1596 ई० में वहां मंदिर का निर्माण कराया गया.आज भी कथाओं में राजा मंगल सिंह एवं सिरपत महाराज की चर्चा विद्यमान हैं.

हिन्दू धर्म के अनुसार जहां-जहां सती देवी के शरीर के अंग गिरे वहां-वहां शक्ति पीठ बन गई.जिसे अत्यंत पावन तीर्थ कहा जाता है.ऐसे शक्ति पीठ भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न स्थानों पर फैले हुए हैं.बताया जाता है कि सती देवी का बायां हाथ रोहियार पंचायत के बंगलिया गांव में गिरा था.जो मां कात्यायनी शक्ति पीठ के नाम से विख्यात हो गया.मां कात्यायनी स्थान 51 शक्तिपीठो में से एक है.जहां दूध चढाने की विशेष परंपरा है.कोसी इलाके ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के पशुपालको का गाय जब भी बच्चा देती है तो गाय द्वारा दी गई पहली बार का दूध मां कात्यायनी स्थान मंदिर में चढाया जाता है. इस मंदिर की खास विशेषता मानी जाती है कि जो भक्तगण सच्चे मन से माता को दूध चढाने के लिए संकल्प लेकर आते हैं.उसका दूध खराब नहीं होता है. प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को बैरागन का दिन है.उस दिन मंदिर में आपार भीड़ उमड़ पडती है.ऐसी मान्यता है कि दूध चढाने से  पशुपालको का पशु स्वस्थ रहता है.

कोसी कालेज के प्राचार्य सह हिन्दी विभागाध्यक्ष डाक्टर रामपुजन सिंह बताते हैं कि शक्ति पीठ मां कात्यायनी की कृपा इलाके में विख्यात है.यह इलाका श्रम शक्ति पर निर्भर है.बाढ व सुखाड़ जैसे प्राकृतिक आपदा के बाद भी इलाके में कभी अकाल की स्थिति उत्पन्न नहीं होना को माता की कृपा मानी जाती है.साथ ही दुर्गम रास्ते के बावजूद भी इलाके के लोग खुशहाल हैं.वहीं सैकड़ों परिवारों की जीविका इस मंदिर से चल रही है.शक्ति पीठ मां कात्यायनी मंदिर से सहरसा जिले के सोनवर्षा प्रखंड के विराटपुर में अवस्थित माँ चण्डी देवी एवं महिषी में अवस्थित शक्ति पीठ माँ तारा देवी की दूरी एक-दूसरे से समान है.तीनों देवी समबाहु त्रिभुज की तरह तीन बिंदु पर विराजमान है.जो बिहार ही नहीं देश में विख्यात है.

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