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…और खुल गया एकाउंट में 99 करोड़ बैलेंस दिखाने का राज

लाइव खगड़िया : जिले के गंगौर थाना क्षेत्र के रहीमा गांव निवासी जयजय राम पासवान के बैंक खाता में 99 करोड़ 99 लाख रूपये बैलेंस दिखाने के चर्चित मामले का जिले की पुलिस ने महज दो सप्ताह के अंदर राज खोल दिया है.उल्लेखनीय है कि बीते माह 22 सितम्बर को रहीमा गांव के बलराम साह सहित 14 अन्य लोगों ने पुलिस अधीक्षक मीनू कुमारी को आवेदन देकर बैंक से लोन दिलाने के नाम पर पासबुक,एटीएम कार्ड,पिन नंबर,बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का सिम ले लेने और लोन नहीं दिलाने की शिकायत की थी.आरोप जिले के अलौली थाना क्षेत्र के शुंभा गजिघाट गांव के अशोक शर्मा,स्थानीय रहीमा गांव के ही इंदू देवी और बेगुसराय जिले के नीमाचांदपुरा थाना क्षेत्र के अजहोर परना गांव के प्रिंस कुमार पर लगाया गया था.मामले मेंं हैरान कर देने वाला एक पहलू यह भी रहा था कि एक आवेदक ने अपने खाता के मिनी स्टेटमेंट का हवाला देते हुए खाता में 99 करोड़ की राशि होने की शिकायत की थी.साथ ही आवेदकों के द्वारा बैंक पासबुक का प्राप्त विवरण के आधार पर खाते से निरंतर रुपये जमा व निकासी किये जाने की शिकायत की गई थी.

मामले की गंभीरता को देखते हुआ पुलिस कप्तान ने गंगौर थानाध्यक्ष को प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान आरंभ करने का निर्देश दिया था.इस आलोक में 23 सितम्बर को गंगौर थाना में तीनों आरोपियों के विरुद्ध कांड संख्या 653/18 दर्ज कर पुलिस अनुसंधान में जुट गई.मामले में अशोक शर्मा व इंदू देवी की गिरफ़्तारी के उपरांत यह बात प्रकाश में आया कि तीसरा नामजद अभियुक्त प्रिन्स कुमार ही इनके मुख्य सहयोगी है और उन्हीं के कहने पर ये दोनों लोगों से बैंक पासबुक,एटीएम कार्ड,पिन नम्बर,मोबाइल सिम कार्ड आदि लोन दिलाने का प्रलोभन देकर लेता था.साथ ही यह बात भी सामने आई कि प्रिंस कुमार एवं उनके सहयोगी द्वारा खाता में जमा/ट्रान्सफर राशि का तुरंत निकासी कर लिया जाता था.पुलिस को जांच के क्रम में जानकारी मिली कि ऐसे खाता जिले के स्टेट बैंक के मुख्य शाखा,एडीबी शाखा व जलकौरा शाखा सहित कैनरा बैंक,सेंट्रल बैंक व इंडीयन ओवरसीज बैंक में खुलवाया गया है और इन खातों के माध्यम से ठगी के पैसे मंगवाकर उसे तुरंत निकाल लिया जाता है.पुलिस द्वारा किये जा रहे अनुसंधान के क्रम में इन बैंकों के शाखा प्रबंधक से भी पूछताछ की गई और सम्बंधित खाता का विवरण लिया गया.इस दौरान एक रोचक तथ्य उभरकर सामने आया कि 99 करोड़ रूपये वाला पासबुक में इतने रूपये का होना गलत है.दरअसल वो होल्ड की गई राशि की अधिकतम सीमा थी, जो दिखलाया जा रहा था.दूसरी तरफ संबंधित विभिन्न खाता के विवरणी से यह भी पता चला कि इस गिरोह के लोग भोले-भाले लोगों को अपनी जाल में फंसाकर उनसे पैसे इन खातों के माध्यम से मंगाकर उसे एटीएम के द्वारा तुरंत निकाल लिया जाता है.संबंधित खातों के प्राप्त विवरणी से पुलिस को यह भी जानकारी मिली की स्टेट बैंक के 5 खातों में करीब 47 लाख रुपये जमा हुआ था जिसकी निकासी की गई है.जबकि कैनरा बैंक के विभिन्न खातों में करीब 85 लाख रूपये मंगाकर निकासी की गई है. साथ ही सेंटल बैंक के विभिन्न खातों से 42 लाख रूपये डलवाकर निकले गए हैं.इसके अतिरिक्त स्टेट बैंक के मुख्य शाखा के लगभग 8 खातों का भी डीटेल्स निकले गए हैं.जबकि कैनरा बैंक के ब्रांच मेनेजर ने मामला दर्ज होने के बाद शाखा के करीब 24 ऐसे खातों को चिन्हित किया है जिससे राशि जमा होने के बाद तुरंत निकाल ली जाती रही है.इन सभी एकाउंट का पुलिस भी जांच कर रही है.

पुलिस अधीक्षक, मीनू कुमारी

मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक के द्वारा विभिन्न बैंकों में जाकर खुद जांच-पड़ताल की गई और साथ ही शाखा प्रबंधकों को संबंधित खातों का केवाईसी व विवरणी की सत्यापित प्रति उपलब्ध करने का निर्देश दिया.साथ ही इन खातों के अतिरिक्त संदिग्ध अन्य खातों की पहचान कर उसे भी जांच के दायरे में लाने को कहा गया है.खासकर अलौली एवं गंगौर इलाके के लोगों के खाते को विशेष रूप से जांच करने का निर्देश दिया गया है.मामला सामने आने के उपरांत पुलिस अधीक्षक ने लोगों से भी अपना एटीएम कार्ड और पिन नंबर किसी को नहीं देने की अपील की है. जांच के क्रम में यह बात भी प्रकाश में आया कि इस गिरोह द्वारा अखबारों में विज्ञापन देकर या फोन कर लोगों को लाॅटरी लगने और चार पहिया वाहन जैसे कीमती सामान मिलने का झांसा देकर इन खातों में रुपये जमा करा लिए जाते थे.बहरहाल मामले में गिरफ्तार दोनों अभियुक्त अशोक शर्मा एवं इंदु देवी को जेल भेज दिया गया है.जबकि जेल में कैद मामले के मुख्य अभियुक्त प्रिंस कुमार को पुलिस रिमांड पर लेने की प्रक्रिया अपना रही है.

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