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पारंपरिक गीतों को संजीवनी प्रदान कर रहे धीरज व नीलू

लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : बिहार की लोक संस्कृति में पारंपरक गीतों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है.लेकिन अन्य लोक कलाओं की तरह झूमर सहित अन्य पारंपरिक गीत भी इन दिनों लुप्त होने के कगार पर है.विलुप्त होती लोक संस्कृति की इस कला को युगल जोड़ी धीरज कांत एवं नीलू संजीवनी प्रदान करने की कवायद में जुटे हुए हैं.


बदलते वक्त में भी नीलू की मैथिली झूमर एवं जिले के चर्चित चतुर्भूजी दुर्गा मंदिर की महिमा संगीत प्रेमियों को आकर्षित कर जाती है.गांव के परिवेश से आने वाले धीरज कांत एवं उनकी पत्नी नीलू का संगीत की क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बन गई है.धीरज कांत गजल व भजन एवं उनकी पत्नी नीलू अंगिका व मैथिली भाषा के पारंपरिक गीतों को जीवंत रखने को कृतसंकल्पित नजर आते हैं.धीरज कांत का जन्म भागलपुर जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत गनोल गांव में हुआ था.कच्ची उम्र में ही उनकेे सिर से माता-पिता का साया उठ गया था.वो जब महज 16 वर्ष के थे उसी वक्त उनके माता-पिताजी चल बसे.जिन्दगी के इस नाजुक मोड़ पर उन्हें संगीत से ही प्रेरणा मिला.बताया जाता है कि बचपन से उन्हें संगीत में काफी शौक था.माता-पिता का साथ छूटने के बाद वे जिले के परबत्ता प्रखंड के अगुवानी डुमरिया बुजुर्ग में अपने एक रिश्तेदार अमर नाथ चौधरी के यहां चले आये और यहीं रहकर उन्होंने पंडित रामावतार सिंह से छह साल तक शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ग्रहण किया.जिसके उपरांत उन्होंने बिहार के मशहूर भिखारी भजन सम्राट फणीभूषण चौधरी से सुगम संगीत के विभिन्न पहलूओं को सीखा और उनकी ही गजल व भजन गाकर संगीत के क्षेत्र में लोकप्रिय हो गए.इस दौरान ईलाके के मशहूर संगीत कलाकार राजीव सिंह से उन्हें प्ररेणा मिलती रही.वक्त के साथ धीेरज कांत ने प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद की शाखा सुशीला संगीत महाविद्यालय नारायणपुर ( चकरामी ) से संगीत में स्नातक भी कर लिया.

युगल जोड़ी की भक्ति गीत भी सुनें :

दूसरी तरफ जिले के गोगरी अनुमंडल के शेर चकला पंचायत की पूर्व मुखिया अनिता देवी की पुत्री नीलू की भी संगीत की क्षेत्र में काफी रूचि थी.शायद संगीत से प्रेम का ही करिश्मा था दोनों विवाह-बंधन में बंध गए.नीलू भी संगीत महाविद्यालय इलाहाबाद से संगीत एवं तबला वादन से स्नातक हैं.उनकी भी मैथिली व अंगिका भाषा के भजन व सुगम संगीत के पारंपरिक गीत क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान रखती है.

बहरहाल नीलू  दिल्ली में छात्र-छात्राओं के बीच संगीत का सुर भर रही हैं.नीलू का मानना है कि लोग पारंपरिक गीतों को भूल रहे हैं.ऐसे में वे अंगिका एवं मैथिली भाषा के पारंपरिक गीतों की अलख जला रही हैं.उनका मानना है कि पारंपरिक गीतों मे गांव की आत्मा बसती हैं.धीरज कांत व नीलू की युगल जोड़ी संगीतकार रवीन्द्र जैन के द्वारा भी सम्मानित हो चुके है.साथ ही देश के प्रथम महिला आइपीएस किरन वेदी के हाथों भी वे संगीत पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं.वर्ष 2007 मे आयोजित बिहार-झारखंड लोक संगीत एवं सुगम संगीत प्रतियोगिता में धीरज कांत को प्रथम एवं द्वितीय स्थान नीलू को ही मिला था.इसके अतिरिक्त भी युगल जोड़ी को उनके गायन के लिए दर्जनों पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.साथ ही टीवी चैनलों पर भी धीरज कांत नज़र आते रहे हैं.कोसी एवं अंग की धरती पर धीरज कांत का कार्यक्रम विभिन्न मौकों पर आयोजित होता रहा है.

नीलू की आवाज में झूमर भी सुन लें :

साथ ही  युगल जोड़ी आकाशवाणी भागलपुर से भी जुड़े हुए हैं.उनका 8 वर्षीय पुत्र संगीत कान्त भी अपने माता-पिता के राह पर चल रहा है.माना जा रहा है कि यह परिवार संगीत के पारंपरिक विधा की टूटती सांसों को संजीवनी प्रदान करने में जुटे हुए हैं.

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