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राजद नेता से मिले ग्रामीण, बंडाल मरम्मति के लिए पहल करने की अपील

लाइव खगड़िया : जिले के सदर प्रखंड के रहीमपुर दक्षिणी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि धरम यादव के साथ रहीमपुर दक्षिणी पंचायत के विभिन्न 13 गांव और मुंगेर जिला के 16 गांवों के ग्रामीणों ने पूर्व नगर सभापति सह राजद नेता मनोहर कुमार यादव से मिले. वहीं ग्रामीणों ने वर्ष 2017 में गंगा नदी के उत्तरी पार मुंगेर घाट से पूर्व निर्मित बंडाल (कटाव निरोधी कार्य) की मरम्मति या पुनः कटाव निरोधी कार्य चलाये जाने की दिशा में पहल करने का आग्रह राजद नेता से किया.

मौके पर पूर्व नगर सभापति मनोहर कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2017 में जिले के मथार सहित 12/13 गांव और मुंगेर जिला के 16 गांवों को कटाव से बचाने के लिए गंगा नदी के उत्तरी भाग मुंगेर घाट से पूर्व पांच किलोमीटर बंडाल का निर्माण कार्य कराने की दिशा में पहल किया था और 57 करोड़ के लागत से बंडाल निर्माण संभव हो पाया था. लेकिन अब वहां फिर कटाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है. वहीं उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने पिछली बार बंडाल निर्माण के लिए केंद्र सरकार और बिहार सरकार के दर्जनों पदाधिकारियों के पास आवेदन दिया था और मुंगेर और खगड़िया के विभिन्न पदाधिकारियों से मिले थे. साथ ही आंदोलन भी किया गया था. लेकिन साकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया था. लेकिन मामले में उनकी पहल रंग लाई और उनके प्रयास से बंडाल का निर्माण संभव हो पाया था. साथ ही उन्होंने बताया कि एक बार फिर वैसी ही स्थिति उत्पन्न हो गई है. ऐसे में मामले को लेकर वे ग्रामीणों के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और जल संसाधन मंत्री से मिलेंगे.

वहीं मुखिया प्रतिनिधि धरम यादव ने कहा कि जिले के सदर प्रखंड के मथार, जंगली टोला करारी, जंगली टोला बरारी, बरखण्डी टोला, मुजोरवा (तांती)टोला, कारूमण्डल टोला, इंग्लिश टोला, सोसायटी टोला सोनवर्षा, एकनिया टोला, शर्मा टोला, पासवान टोला, दुर्गा स्थान टोला सहित मुंगेर के 16 गांव के 2 लाख 50 हजार एकड़ उपजाऊ भूमि प्रभावित हैं. इन सभी गांवों में सड़क, बिजली, एक हाईस्कूल, 8/10 मध्य विद्यालय औऱ 8/10 प्राथमिक विद्यालय और दर्जनों पंचायत भवन निर्मित है. सभी जमीन का रेवेन्यू भी सरकार को मिल रहा है. यदि नये सिरे से बंडाल का निर्माण नहीं होता है तो लाखों की आबादी सहित सभी सड़क, विद्यालय और सैकड़ों इंदिरा आवास योजना से निर्मित मकान गंगा में समा जायेगी. बताया जाता है कि 57 करोड़ की लागत से बने बंडाल का निर्माण जल संसाधन विभाग की देखरेख किया गया था. जिसके बाद बंडाल का मरम्मति कार्य भी कराया गया. लेकिन विगत दो वर्षों से मरम्मति का काम नहीं होने से बंडाल कहीं 50 फीट तो कहीं 100 फीट धंस गया है.

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