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हौसले से उड़ान भर रही दिव्यांग सोनाक्षी, एक पैर पर 1KM की दूरी तय कर जाती हैं स्कूल

लाइव खगड़िया : जमुई की सीमा इन दिनों सुर्खियां में है और उसकी मदद के लिए विभिन्न संगठनों, संस्थानों, बुद्धिजीवियों और शासन-प्रशासन के हाथ भी उठ खड़े हुए है. लेकिन समाज में इस तरह की कई सीमा है जिसे मदद व सहयोग की जरूरत हैं. ऐसे ही में एक नाम जिले के गोगरी प्रखंड के सोनाक्षी का भी लिया जा सकता है.

गोगरी बाजार, बड़ी दुर्गा मंदिर के समीप के निवासी वरूण पंडित की पुत्री 12 वर्षीय सोनाक्षी कुमारी तमाम परेशानियों के बावजूद अपने हौसले से उड़ान भर रही हैं. सोनाक्षी जन्म से ही एक पैर से दिव्यांग हैं. ऐसे में एक पैर से ही वे हर दिन लगभग एक किलोमीटर की दूरी तय कर स्कूल जाती हैं और उनकी पढ़ने की ललक ने दिव्यांगता को बौना करार दिया है. बताया जाता है कि वे तारा मध्य विद्यालय में 7वीं की छात्रा हैं. हलांकि अर्थिक संकट के बावजूद सोनाक्षी के पिता ने अपनी बेटी की परेशानियों को कम करने का हरसंभव प्रयास किया था. उन्होंने एक बड़ी रकम खर्च कर सोनाक्षी को कृत्रिम पैर देने तक की कोशिश की थी. लेकिन बेगूसराय जिले में निर्मित कृत्रिम पैर गुणवत्ता की कसौटी पर खड़ा नहीं उतर सका और उनकी रकम बेकार चली गई. इस बीच सोनाक्षी के पिता ने कुछ माह पूर्व भगवान हाई स्कूल गोगरी जमालपुर में लगी कैंप में ट्राई साइकिल के लिए गुहार भी लगाई थी. लेकिन उन्हें महज आश्वासन ही मिला और आज भी सोनाक्षी एक पैर से फुदक-फुदक कर स्कूल जाने को मजबूर हैं. बताया तो यहां तक जा रहा है कि सोनाक्षी के पिता ने दो वर्ष पूर्व भी बुनियादी केन्द्र में अपनी बच्ची की मदद के लिए गुहार लगाई थी. लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी.

सोनाक्षी के पिता वरूण पंडित सहारा इंडिया में काम करते थे और उस कंपनी की आज की स्थिति सर्वविदित है. कमाई का साधन बंद होने से सोनाक्षी का परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है. दूसरी तरफ वरूण के माध्यम से सहारा इंडिया से जुड़े उपभोक्ता कंपनी से राशि वापसी की मांग पर अड़े हैं. लेकिन कंपनी का अपना ही तर्क है. जो इस परिवार की परेशानियों को और भी बढ़ा गया है. लेकिन तमाम परेशानियों के बावजूद सोनाक्षी अपनी पढ़ाई में लगी हुई हैं. उनकी तमन्ना है कि अपने हौसले के बल पर वो भी एक बड़े अधिकारी बनें. बहरहाल सोनाक्षी को इंतजार है एक ऐसे फरिश्ता की, जो उनके सपने को एक नया पंख दे सके.

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