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…ऐसे तो मिट जाएगा कुआं का अस्तित्व

लाइव खगड़िया : कभी सैकड़ों परिवारों की प्यास बुझाने वाला परंपरागत जलस्रोत प्राचीन कुएं आज अपना अस्तित्व बचाने के संकट से जूझ रहा है. स्थिति यह है कि अधिकांश कुआं पूरी तरह से सूख चुका है और कुछ सूखने की कगार पर है. एक समय ऐसा भी था कि लोग पेयजल व अन्य घरेलू उपयोग हेतु पानी के लिए कुओं पर निर्भर रहते थे. उस दौर में प्राचीन कुओं के घाटों पर रोज सुबह-शाम पानी भरने वालों की भीड़ जमा होती थी और अच्छी खासी चहल-पहल रहती थी. लेकिन अब यहां वीरानी छाई है.

कुछ ऐसा ही हाल जिले के सदर प्रखंड के सन्हौली गांव के वार्ड संख्या 11 स्थित प्राचीन कुआं का है. बताया जाता है कि यह कुआं करीब 200 साल पुराना है. जो कभी सूखा नहीं करता था. इस कुंआ के अस्तित्व को बचाने में ग्रामीणों का सहयोग रहा था. ग्रामीण बताते हैं कि गांव की धरोहर को बचाने के लिए स्थानीय लोगों के द्वारा कुआं की सफाई की जाती थी. इस क्रम में कुआं से दर्जनों कछुओं को बाहर निकाल कर कचड़े की सफाई के बाद पुन: कछुआ को कुआं में छोड़ दिया जाता था. लेकिन अब यह कार्य संभव नहीं हो पा रहा है. क्योंकि दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है. ग्रामीण बताते हैं कि कुआं के बगल में नल-जल योजना का बोरिंग कार्य होने से कुआं क्षतिग्रस्त हो गया है और कुआं के पास की पक्की नीचे धंस गया है. साथ ही कुआं के आसपास की नाली व सड़क भी टूट गई है. ग्रामीणों की मानें तो अगस्त 2021 में योजना के कार्य को रोक सदर अनुमंडल पदाधिकारी व कार्यपालक अभियंता (लोक स्वास्थ्य प्रमंडल खगड़िया) को आवेदन देकर मामले में उचित कार्रवाही करने की मांग की गई थी. लेकिन पहल नहीं हुई और कुआं के क्षतिग्रस्त होने के बाद दुर्घटना के मामले सामने आने लगे. ऐसे में संवेदक के द्वारा कुआं पर जाली लगाकर पुन: कार्य प्रारंभ करने का प्रयास किया गया. लेकिन एक बार फिर उन्हें ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा.

इधर ग्रामीण पांडव कुमार, समरजीत कुमार, जय जय राम यादव, बाबू साहेब यादव, सुरेश यादव, दीपक कुमार, चंद्रशेखर यादव, अजय कुमार, हिरा ठाकुर, जितेंद्र ठाकुर, शुभम कुमार, रौशन कुमार आदि ने मामले में उचित कार्रवाई की मांग जिला प्रशासन से किया है. वहीं ग्रामीण बताते हैं कि कुंआ सूखने के कगार पर है और उसमें कचरे जमा हो गया है. जिससे कुआं का कछुआ सहित अन्य जंतु मृत हो रहे हैं. बताया जाता है कि इस कुआं का उपयोग धार्मिक कार्य व पूजा-पाठ में भी किया जाता था. लेकिन आज इस कुआं के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है.

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