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स्मृति शेष : हौसलों में हद से गुजर गए और देखता रह गया महकमा

लाइव खगड़िया : बीती रात खगड़िया-नवगछिया पुलिस जिला के सीमावर्ती क्षेत्र दुधैला दियारा में डकैतों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए पसराहा थानाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार को जिले के पुलिस लाइन पहुंचते ही माहौल और भी गमगीन हो गया.

वहीँ शहीद दारोगा को गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया.मौके पर एडीजी मुख्यालय लॉ एंड आर्डर आलोक राज,भागलपुर के आईजी सुशील मन सिंह खोपड़े, मुंगेर के डीआईजी जीतेन्द्र मिश्र,डीएम अनिरुद्ध कुमार,एसपी मीनू कुमारी सहित कई पुलिस अधिकारी मौजूद थे.

जाबांज पुलिस पदाधिकारी थे आशीष कुमार सिंह

बताया जाता है कि शहीद दारोगा आशीष कुमार सिंह को जैसे ही सूचना मिली कि कुख्यात दिनेश मुनि गिरोह किसी बड़ी घटना को अंजाम देने दियारा में जमा हुए हैं.वैसे ही वो दो एएसआई व चंद जवान के साथ रात के अंधेरे में दुर्गम इलाके के लिए निकल पड़ें.विकट भौगोलिक स्थिति के बीच उन्हें वहां पहुंचने के लिए ट्रैक्टर तक का सहारा लेना पड़ा. वहीं उन्होंने गोली लगने से जख्मी होने के बाद भी दो अपराधियों को मार गिराया.जो उनके साहस,हिम्मत,जज्बे और जुनून को दर्शाता है.

कहा जाता है कि उनकी जिस थाने में पोस्टिंग होती थी उस क्षेत्र के अपराधी ख़ौफ़ खाने लगते थे.अपनी जिद पर कर्तव्य पथ पर अडिग रहने वाले आशीष कुमार सिंह बीते वर्ष भी अपराधियों की गोली से बाल-बाल बचे थे.जिले के मुफस्सिल थाना में पोस्टिंग के दौरान भदास में अपराधियों के विरुद्ध ऑपरेशन के क्रम में उन्हें एक गोली लगी थी.बताया जाता है कि उनके शुभचिंतक भी उन्हें अतिउत्साह से बचने की सलाह देते थे.लेकिन अपने कर्तव्य से लापरवाही उन्हें जरा भी मंज़ूर नहीं था.बीते माह भी उन्होंने क्षेत्र का आतंक कुख्यात बौकू को हथियार के साथ गिरफ्तार कर जिले की पुलिस की उपलब्धियों में एक नया अध्याय जोड़ा था.इसके पूर्व भी कई बड़ी उपलब्धियां उनके नाम रही थी.

मां हैं कैंसर पीड़ित,इलाज के क्रम में जाना था दिल्ली

अपने ड्यूटी के पक्के आशीष कुमार सिंह पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति भी काफी गंभीर थे.मिली जानकारी के अनुसार उनकी मां कैंसर के मरीज हैं.जिनका दिल्ली से इलाज चल रहा है.इस क्रम में वो अपने मां को लेकर इलाज के लिए दिल्ली भी जाते थे.बताया जाता है कि उन्हें अगले माह ही वहां मां के इलाज के लिए जाना था.लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था.

2010 में हुई थी शादी

शहीद आशीष कुमार सिंह को 2009 में पुलिस विभाग में सेवा प्रदान करने का अवसर मिला था.जबकि वर्ष 2010 में उनकी शादी मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज थाना क्षेत्र के मुरली चंदवा गांव निवासी नवल किशोर सिंह की पुत्री सरिता से हुई थी.उन्हें एक पुत्र व एक पुत्री सहित कुल दो संताने है.

बीती रात ही आवास पर आये थे शहीद के दोनों बच्चे

बताया जाता है कि शहीद के 7 वर्षीय पुत्र शौर्य व पांच वर्षीय पुत्री आर्या दुर्गा पूजा की छुट्टी में बीती रात ही सिल्लीगुड़ी से पसराहा स्थित आवास पर आये थे.बच्चों को खाना खिलाने के बाद वे उनसे जल्द लौटने का वादा कर ड्यूटी पर निकल गए.लेकिन वो पुनः अपने परिवार के बीच वापस नहीं लौट सके.

दुर्गा मेला में घर आने का परिजनों से कर आये थे वादा

सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के सरोजा गांव निवासी गोपाल सिंह के पुत्र शहीद आशीष कुमार सिंह कुछ दिनों पूर्व ही गांव पहुँच कर दुर्गा पूजा के मद्देनजर सारी व्यवस्थाएं कर आये थे.बताया जाता है कि मन्नत उतरने के क्रम में गांव में बनने वाली दुर्गा की प्रतिमा इस वर्ष उनके ही खर्च से स्थापित की गई है.नवरात्र के दो दिन पूर्व ही गांव पहुंच कर वहां की व्यवस्थाये सुनिश्चित कर इस अवसर पर लगने वाले मेले में आने का वादा कर गए थे.लेकिन परिजनों सहित ग्रामीणों को उनका इंतजार ही रह गया और वो किसी अन्य दुनिया में खो गए.

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