Breaking News

शांति, सत्य और करुणा के संदेशवाहक थे महात्मा बुद्ध

लाइव खगड़िया : जिले के सदर प्रखंड के रहीमपुर मध्य पंचायत के नन्हकू मंडल टोला स्थित मेनका-कार्तिकेय सदन में सोमवार को बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा गौतम बुद्ध की 2566 वीं जयंती समारोह का आयोजन किया गया. जिसकी अध्यक्षता संविदा कर्मी महासंघ के प्रदेश प्रवक्ता व मुंगेर प्रमंडलीय प्रभारी आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने किया. जबकि समारोह का उद्घाटन स्थानीय मुखिया कृष्ण कुमार ठाकुर ने कैंडल प्रज्वलित कर बुद्ध वन्दना के साथ किया. वहीं उपस्थित लोगों ने बुद्ध के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि कर नमन किया.

इस अवसर पर आचार्य राकेश पासवान शास्त्री एवं राजद नेता मौसम कुमार गोलू के द्वारा पंचायत के मुखिया कृष्ण कुमार ठाकुर, पंचायत समिति सदस्या अमला देवी, उप सरपंच धर्मेन्द्र कुमार यादव, उप मुखिया प्रतिनिधि दीपक कुमार सिंह, वार्ड सदस्या आराधना कुमारी, कल्पना देवी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को अंग वस्त्र व बुके भेंट कर सम्मानित किया गया.


मौके पर संबोधित करते हुए मुखिया कृष्ण कुमार ठाकुर ने बुद्ध के विचारों को आत्मसात करने तथा मृत्यु भोज पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत पर बल दिया. साथ ही उन्होंने कहा कि वे शांति-सौहार्द कायम कर सामाजिक विकास करने को कटिबद्ध हैं. वहीं आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने कहा कि महात्मा बुद्ध के बताये करूणा, मैत्री, शांति-सौहार्द व सत्य- अहिंसा की राह पर चल कर ही स्वच्छ, सुन्दर व विकसित समाज और राष्ट्र की परिकल्पना किया जा सकता हैं. साथ ही उन्होंने बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने एवं बाल विवाह, दहेज प्रथा, नशा सेवन, भ्रूण हत्या, बाल मजदूरी एवं मृत्यु भोज पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में जनप्रतिनिधियों से प्रयास करने का अनुरोध किया. जबकि राजद नेता मौसम कुमार गोलू ने महात्मा बुद्ध के विचारों पर प्रकाश डालते हुए मृत्यु भोज का वहिष्कार करने पर बल दिया.

समारोह को पंसस अमला देवी, उप सरपंच धर्मेन्द्र कुमार यादव, उप मुखिया प्रतिनिधि दीपक कुमार सिंह, राहुल कुमार यादव एवं अखिलेश यादव ने भी संबोधित किया. इस अवसर पर वार्ड सदस्या कल्पना देवी, सनोज साह, सुलेखा देवी, उर्मिला देवी, संत कार्तिक पासवान, उपेन्द्र दास, घोटर यादव, पूर्व वार्ड सदस्य क्रांति देवी, शरद कुमार उर्फ मन्टू, ईशा देवी, कुमारी कीर्ति, सूर्यवंश कुमार, अनुवर्ता कुमारी, मिलन कुमारी, रेशम कुमारी आदि उपस्थित थे.

Check Also

संस्कृत के बिना संस्कृति को बचाना मुश्किल : शंकर शर्मा

संस्कृत के बिना संस्कृति को बचाना मुश्किल : शंकर शर्मा

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: