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आठ वर्षीय निधि ने दी मां-पिता व भाई को मुखाग्नि,नम थी हर आंखें

खगडिया (मुकेश कुमार मिश्र) : मासूम सी बच्ची,एक आँगन की कली थी,माँ-बाप के आँखों का तारा व अरमानों से पली थी…जिसकी मासूम अदाओ से,माँ-बाप का दिन बन जाता था,जिसकी एक मुस्कान के आगे पत्थर भी मोम बन जाता था…विधि का विधान कैसी घड़ी ले आई उस परिवार के लिए,मां-बाप व भाई को मुखाग्नि देने मासूम उतरी से लिपटी खड़ी थी…आंखें नम कर देने वाला यह दृश्य बुधवार को जिले के परबत्ता प्रखंड के सलारपुर दियारा के गंगा घाट पर देखने को मिली.जहां बिशौनी गांव में मंगलवार को घटित एक हृदय विदारक घटना में एक ही परिवार के तीन लोगों की बिजली का करंट लगने से हुई मौत के बाद उनका दाह-संस्कार किया जा रहा था.वहीं घटना के उपरांत बुधवार को सलारपुर दियारा के गंगा घाट पर आठ साल की निधि ने अपने पिता सतीश सिंह,माता धरनी देवी एवं भाई अरबिंद को मुखाग्नि दिया.जिस दृश्य को शब्दों में नहीं ढाला जा सकता है.बस इसे महसूस ही किया जा सकता था.एक ही परिवार के तीन सदस्यों के दाह-संस्कार के वक्त वहां मौजूद हर आंखे नम थी.वहीं छोटी सी निधि के आंखों का आंसू तो मानों घटना के बाद से ही रो-रो कर जैसे सूख चुका था.साथ ही चित्कार से उनका गला भी सूज गया था.वो खामोश थी…स्तब्ध थी…एक छोटी सी उम्र में वो जिन्दगी के उस मोड़ पर खड़ी थी जहां एक साथ उनके सिर से मां-बाप व एक भाई का साया उठ चुका था.जिन्दगी की अंजान राहों पर उसने अभी तो ठीक से चलना भी नहीं सीखा था और इस बीच अंगुली पकड़ कर संभालने वाले उसके पिता,मां व एक भाई इस दुनियां चल बसे.गौरतलब है कि निधि का बड़ा भाई धमेन्द्र भी है.जो कि मुम्बई में नौकरी करता है.घटना के जानकारी उन्हें कल ही दी गई.बताया जाता है कि जानकारी मिलते ही वो फौरन घर की तरफ रवना हो चुका है.लेकिन दूरियां इतनी लंबी थी कि बुधवार को भी वो अपने घर नहीं पहुंच सका.इस बीच मासूम निधि के द्वारा मृतकों का दाह-संस्कार कराया गया.उम्मीद की जा रही है कि धर्मेन्द्र गुरूवार तक अपने घर पहुंच जायेगा.घटना के लगभग 36 घंटे बीत चुके हैं और लगभग 24 घंटों का इंतजार छोटी सी निधि को अपने बड़े भाई से मिलने को करना पड़ेगा.इस बीच कई अपनों से सदा के लिए दूर होकर अपने भाई के इंतजार में इस घड़ी को अकेली मासूम निधि ने कैसे बिताई होगी इसकी महज कल्पना ही की जा सकती है.बताया जाता है कि यह परिवार मूल रूप से परबत्ता प्रखंड के कुल्हड़िया पंचायत के सलारपुर गांव का निवासी था.लेकिन कुछ वर्ष पूर्व ये लगार पंचायत के बिशौनी गांव में आकर बस गये.मिली जानकारी के अनुसार मृतक के दाह-संस्कार के लिए कुल्हड़िया पंचायत स्तर से कबीर अंतोष्ठि योजना का लाभ दिया गया है.वहीं घटना के बाद पूरा गांव ही शोक में डूबा हुआ है.

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