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एक संघर्ष : दिव्यांगता को कभी अभिशाप नहीं बनने देने की…

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लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : कुछ लोग जहां थोड़ी मुश्किलों से घबरा जाते हैं तो कुछ इन मुश्किलों के बीच भी अपनी मंजिल तलाश लेते हैं.  ऐसी ही कुछ कहानी है जिले के परबत्ता प्रखंड के रामपुर उर्फ रहीमपुर पंचायत के रहीमपुर निवासी मधुकर माही उर्फ छोटू मास्टर की. रेशम विभाग के ओवरसियर पद से सेवानिवृत स्वर्गीय नंदलाल शर्मा व वीणा देवी के 27 वर्षीय पुत्र मधुकर माही अपने दोनों ही पैर से  दिव्यांग हैं. लेकिन उन्होंने कभी अपनी दिव्यांगता को अभिशाप नहीं बनने दिया और आज ऐसे तमाम लोगो के लिए एक प्रेणास्रोत बनकर उभरे हैं.




बताया जाता है कि मधुकर माही बचपन से ही अपने दोनो पैर से विकलांग हैं. तीन भाईयों में सबसे छोटे मधुकर माही अंग्रेजी से स्नातकोत्तर कर रहे है और साथ ही रहीमपुर में न्यू भारती कोचिंग सेंटर खोलकर इंटर की छात्र-छात्राओं को अंग्रेजी की शिक्षा प्रदान कर रहे है. एक शिक्षक के रूप में उनकी उपलब्धियों का अंदाजा इसी से ही लगाया जा सकता है कि जब सुबह उनके कोचिंग की क्लास शुरू होती है तो सड़क पर साईकिलों की कतार लग जाती है.

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आज उनके यहां क्षेत्र के लगभग तीन सौ छात्र पठन-पाठन कर रहे  हैं. साथ ही वे दिव्यांग छात्र-छात्राओ को मुफ्त में शिक्षा भी दे रहे हैं. उनकी अंग्रेजी से पीएचडी करने की तमन्ना है. ताकि कॉलेज में एक शिक्षक के रूप में योगदान देकर क्षेत्र में शिक्षा की लौ को आजीवन फैला सकें.




मधुकर माही उर्फ छोटू मास्टर  की बचपन से ही अंग्रेजी में काफी रूचि रही है. उनसे शिक्षा प्राप्त कर आज उनके कई छात्र वायुसेना, जलसेना एवं थलसेना में कार्यरत हैं. क्षेत्र के लोग भी दिव्यांग मधुकर माही के संघर्ष और प्रतिभा के कायल हैं. पढ़ाने की उनकी शैली ही उन्हें अन्य शिक्षकों से अलग करती है. दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग को मधुकर अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं. जो चलने-फिरने और कुछ बोल सकने से लाचार होने के बावजूद कई ऐसी खोज कर डाली, जिससे विज्ञान की दुनिया ही बदल गया.


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