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लोकतंत्र का महापर्व : याद उन्हें भी कर लो जो हार कर भी मिलने आये




लाइव खगड़िया : लोकतंत्र के महापर्व में खगड़िया संसदीय सीट पर मतदान की प्रक्रिया मंगलवार को पूरी हो जायेगी और उसके पूर्व रविवार की शाम से उम्मीदवारों के प्रचार का शोर भी थम जायेगा.संभव है कि उसके बाद एक बार फिर जिले में एक राजनीतिक शून्यता का एहसास बना रहे.शायद यह सही वक्त है कि हम अतीत के आईने से विगत के वर्षों के कुछ चुनावी पहलवानों पर नजर डाल लें.बात यदि विगत के चुनावों की करें तो उन चुनाव में जीत हासिल करने वाले प्रत्याशियों की चर्चाएं होती ही रही है और होती ही रहेंगी. लेकिन चुनाव में हार के बाद भी क्षेत्र में अपनी सक्रियता बनाये रखने वाले भी कुछ नाम हैं जो चर्चाओं से परे रहे हैं.इस कड़ी की शुरुआत फिलहाल विगत लोकसभा चुनाव में राजद की प्रत्याशी रही कृष्णा कुमारी यादव,विगत विधानसभा चुनाव में परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रहे रामानुज चौधरी और बेलदौर विधान सभा क्षेत्र से जाप के प्रत्याशी रहे नागेन्द्र सिंह त्यागी के नामों के साथ कर रहे हैं.

कृष्णा कुमारी यादव

विगत लोकसभा चुनाव में राजद प्रत्याशी के तौर पर कृष्णा कुमारी यादव दूसरे स्थान पर रही थी और हार के बाद भी वो क्षेत्र में काफी सक्रिय नजर आती रहीं.हलांकि राजनीतिक रूप से इसे अगले चुनाव की गतिविधियों के तौर पर देखा जाता रहा था.इस बात को बल इसलिए भी मिलता रहा कि यादव बहुल खगड़िया संसदीय क्षेत्र राजद की परंपरागत सीट मानी जाती रही थी.लेकिन गठबंधन के दौर में यह सीट वीआईपी ले उड़ी.लेकिन इसके बाद की कहानी किसी कार्यकर्ता के लिए दुखद माना जा सकता है.



महागठबंधन में खगड़िया की सीट वीआईपी कोटे में जाने की चर्चाओं के बीच कृष्णा कुमारी यादव का सीपीआई से चुनाव लड़ने की चर्चाएं मीडिया में चली और वे पार्टी से निष्कासित कर दी गई. हलांकि उन्होंने खुद से इस बात की घोषणा भी नहीं की थी.यदि कृष्णा की माने तो पार्टी से निष्कासन की खबरें भी उन्हें मीडिया से ही मिली और उनसे स्पष्टीकरण तक भी नहीं पूछा गया.जबकि बीते कुछ दिनों में राजद के एक बड़े नेता दो संसदीय क्षेत्र में पार्टी की गाइड लाइन से अलग कार्य कर रहे हैं.लेकिन अबतक संबंधित पर कार्रवाई नहीं की जा सकी है.लाजिमी है चेहरा देखकर कार्रवाई करना आज जैसे राजनीतिक दलों की फितरत बन गई है.ऐसे में एक आम कार्यकर्ताओं के दर्द को सहज ही समझा जा सकता है.

रामानुज चौधरी

परबत्ता विधानसभा के विगत चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के तौर मैदान में उतरे रामानुज चौधरी को भले ही चुनाव में सफलता नहीं मिली हो लेकिन चुनाव के उपरांत भी वो क्षेत्र में काफी सक्रिय नजर आये हैं.इस क्रम में वे विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक कार्यक्रमों में क्षेत्र में अपनी उपस्थिति का एहसास कराते रहे हैं और वक्त-बेवक्त वो लोगों के सुख-दुख में साथ नजर आते रहे हैं.साथ ही पार्टी के प्रमुख कार्यक्रमों में भी वे अपनी उपस्थिति परबत्ता क्षेत्र में दर्ज कराते रहे हैं.

नागेन्द्र सिंह त्यागी

विगत विधान सभा चुनाव में बेलदौर से जाप प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे नागेन्द्र सिंह त्यागी इस बार के लोकसभा चुनाव में खगड़िया से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं.उनकी गिनती जिले के एक चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में रही है.उनकी लोकप्रियता का अंदाजा महज इतना से लगाया जा सकता है कि चुनावी मौसम में चरम पर पहुंची राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच उनके व्यक्तित्व के खिलाफ सोशल साइट तक पर एक शब्द दिखाई नहीं देता.एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर उनकी सक्रियता क्षेत्र में सदैव बनी रही है.साथ ही विभिन्न मुद्दों को लेकर उनके द्वारा लगातार संघर्ष किया जाता रहा है.

(इस कड़ी में कुछ और नामों की चर्चा अगली कड़ी में…)


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