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खगड़िया : कैसर के लिए लोजपा से उम्मीदवारी आसान नहीं…




लाइव खगड़िया : बिहार में लोकसभा की 40 सीटों के बंटवारे का एनडीए ने रविवार को ऐलान कर दिया है.जिसके तहत 17-17 सीटों पर भाजपा और जदयू चुनाव लड़ेगी.जबकि लोजपा को 6 सीटें दी गई है.हलांकि कौन सी सीटों पर किस दल का उम्मीदवार होगा,इसका ऐलान अभी बाकी है.लेकिन चर्चाओं पर यदि विश्वास करें तो लोजपा द्वारा 2014 में जीती गई सीटों में से वैशाली,हाजीपुर,जमुई व समस्तीपुर में पुनः लोजपा की उम्मीदवारी लगभग तय है.जबकि मुंगेर व नालंदा सीटों का त्याग लोजपा द्वारा किया जा सकता है.लेकिन लोजपा के लिए खगड़िया संसदीय सीट पर अभी भी कई लोचा है.

उल्लेखनीय है कि 2014 के चुनाव में लोजपा प्रत्याशी के रूप में चौधरी महबूब अली कैसर यहां से बाजी मारे थे.खगड़िया से लोजपा के उम्मीदवारी की असमंजसता के लिए कुछ वजह बदले राजनीतिक हालात की रही है तो कुछ वर्तमान लोजपा सांसद ने खुद खड़ा कर लिया है.उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए छोड़कर महागठबंधन में शामिल होने के बाद बिहार में एनडीए को कुशवाहा जाति के वोटरों को साधने के लिए इस जाति के नए नेता की तलाश थी.ऐसे में बीते वर्ष ही भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक सम्राट चौधरी को तब्बजों मिली और उनकी राजनीतिक कर्मभूमि खगड़िया का होना राजनीतिक दृष्टिकोण से लोजपा के वर्तमान सांसद महबूब अली कैसर के लिए टिकट की रेस में एक चुनौती खड़ा कर गया.वर्तमान में भाजपा की तरफ से उम्मीदवारी के मामले में वो आगे चल रहे हैं.



लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि सिर्फ सम्राट चौधरी ही वर्तमान लोजपा सांसद के लिए मुसीबतें पैदा नहीं कर रहे हैं बल्कि इससे बड़ी मुसीबतें तो उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान खुद पैदा कर ली थी.राजनीतिक गलियारों में चल रही बातों पर यदि विश्वास करें तो 2014 का चुनाव उन्होंने जिस भाजपा कार्यकर्ताओं के सहारे जीता था,उनके साथ भी सांसद के वो संबंध नहीं रहे जो कि अमूमन गठबंधन धर्म में दिखनी चाहिए थी.रही सही कसर उन्होंने बीते दिनों भाजपा सरकार के खिलाफ बयान व लोजपा सुप्रीमो को एनडीए से अलग होने की नसीहत देकर पूरी कर दी.साथ ही साथ जनअपेक्षाओं पर वो कितना खड़ा उतर पायें हैं,इस पर भी संसय कायम रहा है.

माना जा रहा है 2019 के चुनाव में दोनों ही प्रमुख गठबंधनों के बीच कांटे का संघर्ष होगा.ऐसे में दोनों ही गठबंधन उम्मीदवारी के मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है.पार्टी के आंतरिक सर्वे पर भी बहुत कुछ तय होना है.इन सब बातों से इतर लोजपा सांसद का एनडीए छोड़ने की चर्चाएं भी विगत कुछ दिनों से मीडिया में सुर्खियां बटोरती रही है.ऐसे में यदि लोजपा के हिस्से में खगड़िया सीट आ भी गई तो महबूब अली कैसर की परेशानी कम होती नहीं दिखती.दूसरी तरफ लोजपा के लिए भी किसी नये प्रत्याशी की तलाश एक चुनौती होगी.ऐसी परिस्थिति में लोजपा द्वारा खगड़िया की जगह किसी अन्य सीट के विकल्प की संभावनाओं से भी पूरी तौर पर इंकार नहीं किया जा सकता है.



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