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खगड़िया में अफ्रीकन स्वाईन फीवर ने दी दस्तक, मारे जाएंगे इनफेक्टेड जोन के सुअर

लाइव खगड़िया : जिले के सदर प्रखंड के जय प्रकाश नगर के सूअरों में अफ्रीकन स्वाईन फीवर रोग की पुष्टि हुई है और विभागीय निर्देशानुसार इनफेक्टेड जोन के 1 किलोमीटर परिधि में सूअरों को उच्चस्तरीय टीम के निगरानी में मारने का फैसला लिया गया है. सूअरों में अफ्रीकन स्वाईन फीवर रोग की पुष्टि होने के उपरांत शनिवार को जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया है.

विदित हो कि जिले में सूअरों के अचानक मरने की सूचना पर जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए पशुपालन विभाग के उच्चस्तरीय जांच दल को बुलाया गया था. जिसके उपरांत पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, पटना से आए उच्च स्तरीय जांच दल के द्वारा जयप्रकाश नगर के वार्ड नंबर 22 एवं 23 में सूअरों में फैली अज्ञात बीमारी की जांच 27 जुलाई को की गई थी एवं सैंपल कलेक्शन किया गया था. संग्रहित सैंपलों को जांच के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद- राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, आनंद नगर, भोपाल भेजा गया और संस्थान से प्राप्त रिपोर्ट में 7 में से 5 सैंपल पॉजिटिव आने के बाद सूअरों में अफ्रीकन स्वाईन फीवर रोग होने की पुष्टि हुई.

साथ ही पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार द्वारा अफ्रीकन स्वाइन फीवर रोग के रोकथाम के लिए निर्देश प्राप्त हुआ. जिसके तहत नेशनल एक्शन प्लान के अनुसार अफ्रीकन स्वाईन फीवर रोग उद्भेदन स्थल से ग्रसित क्षेत्र के 1 किलोमीटर की परिधि में आने वाले सभी ग्राम/ वार्डों को चिन्हित कर ‘इनफेक्टेड जोन’ घोषित करते हुए शमन संबंधी आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश प्राप्त हुआ. मिली जानकारी के अनुसार शमन के उपरांत लाभुकों को मुआवजा भुगतान करने का भी प्रावधान है.

इधर अफ्रीकन स्वाईन फीवर रोग के रोकथाम हेतु विभागीय निर्देश के अनुपालन के क्रम में इनफेक्टेड जोन जयप्रकाश नगर के सभी सूअरों को मारने एवं इसके एवज में सूअर पालकों को मुआवजा देने का निर्णय जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया. बताया जाता है कि सूअर पालकों को मुआवजा की दर एवं प्रक्रिया निर्धारित है और इसके लिए राशि पशुपालन निदेशालय, बिहार के द्वारा दी जाएगी.

बताया जाता है कि यदि इनफेक्टेड जोन के सूअरों को नहीं मारा जाएगा, तो इस रोग का विस्तार जिले के सभी प्रखंडों में होने की संभावना है. इनफेक्टेड जोन से 10 किलोमीटर के परिधि में स्थित क्षेत्र को सर्विलांस जोन मानते हुए अगले 3 माह तक यहां से नमूनों का संग्रहण कर जांच हेतु संस्थान को उपलब्ध कराया जायेगा. जबकि मारे जाने वाले सूअरों एवं अन्य सामग्री को गहरे से दफनाया जायेगा. बताया जाता है कि अफ्रीकन स्वाईन फीवर रोग के लिए कोई विशिष्ट चिकित्सा या टीकाकरण उपलब्ध नहीं है. हलांकि मानव स्वास्थ्य या अन्य पशुओं के स्वास्थ्य पर इस रोग से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.

बैठक में अपर समाहर्ता मोहम्मद राशिद आलम, जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉक्टर मोहम्मद मोइनुद्दीन, सदर अनुमंडल पदाधिकारी अमित अनुराग एवं सहायक कुकुट पदाधिकारी डॉक्टर संगीत शर्मा उपस्थित थे.

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