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मैं निर्दोष हूं, यह बिहार का बच्चा-बच्चा जानता है : आनंद मोहन

लाइव खगड़िया : मारपीट के एक पुराने मामले में पेशी के लिए पूर्व सांसद आंनद मोहन मंगलवार को जिला कोर्ट पहुंचे. मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 1999 में जिले के चौथम थाना में आनंद मोहन के खिलाफ धारा 323 के तहत केस दर्ज हुआ था. जिस मामले में वे एसीजेएम -1 के सामने पेश हुए. इस बीच कोर्ट परिसर में गहमागहमी का माहौल रहा और उनके समर्थकों की भीड़ लगी रही.

मौके पर आनंद मोहन ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि बिहार विकास व कानून व्यवस्था के मामले में कहां है, यह सब जानते हैं और इस पर बहुत कुछ कहने की जरूरत नहीं है. लेकिन जिस मामले में वे सजा काट रहे हैं, उसमें वे निर्दोष हैं और इस बात को बिहार के लोग व यहां का बच्चा-बच्चा जानता है. साथ ही सुशासन में बैठे लोगों को भी इस बात की जानकारी है. बावजूद इसके उन्हें राजनीति का शिकार बनाया गया है. साथ ही उन्होंने इंसाफ की उम्मीद जाहिर किया.

उल्लेखनीय है कि 5 दिसंबर 1994 को गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया की हत्या हुई थी और प्रदर्शन के दौरान भीड़ को उकसाने का आरोप आंनद मोहन पर लगा था. मामले में आनंद मोहन सहित 6 लोगों को आरोपी बनाया गया था. साल 2007 में पटना हाईकोर्ट ने आनंद मोहन को दोषी ठहराया और फांसी की सजा सुनाई. यह आजाद भारत में पहला मामला था, जब किसी नेता को मौत की सजा सुनाई गई थी. हालांकि 2008 में इस सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया. बहरहाल वे इसी मामले में सजा काट रहे हैं. 1995 में आनंद मोहन के राजनीतिक जीवन में एक ऐसा वक्त भी आया था, जब युवाओं के बीच उनकी छवि मुख्यमंत्री के तौर पर भी उभरने लगी थी. 1995 में उनकी पार्टी बिहार पीपुल्स पार्टी ने नीतीश कुमार की समता पार्टी से बेहतर प्रदर्शन किया था.

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