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लेखन के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रीति को मिला ‘सीमा अपराजिता सम्मान’

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लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : जिले के गोगरी प्रखंड के बसुआ गांव के रंचल में बचपन गुजारने वाली प्रीति कुमारी को लेखन के क्षेत्र में उनके योगदान के लिये सीमा अपराजिता सम्मान प्रदान किया गया है. उन्हें पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल पं केशरी नाथ त्रिपाठी के हाथों सम्मानित किया गया है. गुफ्तगू पत्रिका के द्वारा प्रयागराज में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में प्रति को सम्मान मिला है. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में डीआईजी सर्वश्रेष्ठ तिवारी समेत कई अन्य प्रमुख पदाधिकारी मौजूद थे.

मौके पर आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रीति कुमारी ने कहा कि आज मंच पर केवल वे सम्मानित नहीं हो रही हैं बल्कि जिन गुमनाम लोगों की जिंदगी का दर्द उन्होंने सबके सामने लाने का प्रयास किया है, उन सभी के दर्द को पहली बार मरहम मिला है. साथ ही उन्होंने कहा कि इस किताब के माध्यम से उनकी ख़ामोशी को आज पहली दफा सुना जा रहा है, यह उनके लिये बहुत सम्मान की बात है. कहने को तो हम इस एक दुनिया में रहते हैं, परंतु यहां सबकी अलग-अलग दुनियां होती है. आजादी के इतने सालों के बाद भी इस देश में सिर पर मैला ढ़ोने जैसे घृणित पेशा को जाति के नाम पर चलाया जा रहा है. ‘मैली जिंदगी’ नामक उनकी पुस्तक में इन मजदूरों के दर्द को पिरोया गया है. कोरोना काल में लाखों मजदूरों व कामगारों को जिस बेरुखी से समाज और सरकार ने अनाथ करके सड़कों पर अपना घर तलाशने के लिए छोड़ दिया तो उन्हें कलम उठाना ही पड़ा और ‘छलके छाले छल के’ नामक पुस्तक सामने आई. जिसमें उनके दर्द को जुबान देने की कोशिश की गई, जिसको अपने ऊपर टूटे कहर को बयां करने को अल्फाज़ नहीं थे. वहीं उन्होंने कहा कि समाज के युवाओं के साथ आज जो कुछ भी हो रहा है और उस पर किसी की नजर नहीं जा रही तो लेखक का फर्ज है कि उसे समाज के सामने रखे. लिहाजा ‘मेरे सपने हुए सच’ नामक उपन्यास में सौरभ की घनघोर गरीबी से संघर्ष करके सफलता की नयी बुनियाद तैयार करने का लेखा-जोखा है. जिसमें एक परिवार की परस्पर प्रेम और त्याग की अद्भुत कहानी है. जहां एक पिता ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चे को होनहार बनाने और सफलता दिलाने में अपनी जिंदगी झोंक दिया. इस अवसर पर उन्होंने बताया कि फिलहाल वे बांझ महिलाओं की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना को लेकर एक उपन्यास पर काम कर रही है, जो जल्द ही सामने होगा.

जिले के बसुआ निवासी मिलन कुमार की बहन प्रीति कुमारी की साहित्य साधना पर गांव के लोगों को भी गर्व है. बताते चलें कि पुर्णियां जिले के जानकीनगर निवासी ओमप्रकाश यादव एवं नमिता देवी की पुत्री प्रीति कुमारी का बचपन जिले के गोगरी प्रखंड के बसुआ गांव में अपने ननिहाल में गुजरा है. लेखिका के मामा सह बसुआ निवासी बबलू यादव ने बताया कि प्रीति बचपन से ही समाज के प्रति संवेदनशील थीं.


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