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गंगा दशहरा आज, जान लें सबकुछ, पूजा-विधि से लेकर पर्व का महत्व तक

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लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : हर वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है और इस वर्ष आज ही वो दिन है. बुजूर्ग लोगों की मानें तो इस दिन से गंगा की जल में बढ़ोत्तरी होने लगती है. गंगा दशहरा के अवसर पर गंगा तट पर स्नान के लिए श्रद्धालुओ की भीड़ उमड़ पड़ी है. स्कंदपुराण के अनुसार गंगा दशहरे के दिन व्यक्ति को किसी भी पवित्र नदी में स्नान कर ध्यान तथा दान करना चाहिए. इससे पापों से मुक्ति मिलती है. यदि कोई मनुष्य पवित्र नदी तक नहीं जा पाता है तब वह अपने घर पास की ही किसी नदी पर स्नान कर सकते हैं.

गंगा दशहरे का महत्व

मान्यता है कि जिस दिन भगीरथी की तपस्या के बाद जब गंगा माता धरती पर आईं थीं वो दिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी का ही दिन था. बाद में गंगा माता के धरती पर अवतरण के दिन को ही गंगा दशहरा के नाम से पूजा जाना जाने लगा. इस दिन गंगा नदी में खड़े होकर जो गंगा स्तोत्र पढ़ता है वह अपने सभी पापों से मुक्ति पाता है. स्कंद पुराण में दशहरा नाम का गंगा स्तोत्र का उल्लंघन है.




गंगा दशहरे के दिन श्रद्धालु जिस भी वस्तु का दान करें उनकी संख्या दस होनी चाहिए और जिस वस्तु से भी पूजन करें उनकी संख्या भी दस ही होनी चाहिए. मान्यता रही है कि ऐसा करने से शुभ फलों में और अधिक वृद्धि होती है.

गंगा दशहरे का फल

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पापों का नाश होता है. इन दस पापों में तीन पाप कायिक, चार पाप वाचिक और तीन पाप मानसिक होते हैं. इन सभी से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है.

पूजा विधि

इस दिन पवित्र नदी गंगा में स्नान किया जाता है. यदि कोई मनुष्य वहां तक जाने में असमर्थ हो तो अपने घर के पास किसी नदी या तालाब में गंगा मैया का ध्यान करते हुए स्नान कर सकते हैं. गंगा जी का ध्यान करते हुए षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए. गंगा जी का पूजन करते हुए पांच  पुष्प अर्पित कर गंगा को धरती पर लाने वाले भगीरथी का नाम मंत्र से पूजन करना चाहिए. इसके साथ ही गंगा के उत्पत्ति स्थल को भी स्मरण करना चाहिए. गंगा जी की पूजा में सभी वस्तुएं दस प्रकार की होनी चाहिए. जैसे कि दस प्रकार के फूल, दस गंध, दस दीपक, दस प्रकार का नैवेद्य, दस पान के पत्ते, दस प्रकार के फल आदि-आदि…


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