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खगड़िया : चुनावी मौसम में राजनीति की राजधानी में होगी टिकटों की बारिश !




लाइव खगड़िया (मनीष कुमार) : चुनावी साल में विभिन्न दल के टिकट को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो चली है. हलांकि गठबंधन के इस दौर में जिले की कौन सी सीट किस घटक दल के नाम रहता है, यह देखना दीगर होगा. लेकिन विभिन्न दल से टिकट की चाहत रखने वाले पार्टी कार्यकर्ता अपनी जुगत लगाने में जुट गए है. इस रेस में जिले के चुनावी राजनीति का राजधानी कहे जाने वाला मानसी प्रखंड के चुकती गांव के भी कई राजनीतिज्ञ शामिल है. दरअसल खगड़िया विधान सभा क्षेत्र के अस्तित्व में आने के बाद अबतक हुए 16 चुनावों में 8 बार विभिन्न दल व निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुकती गांव के ही प्रत्याशी जीत की इबादत लिख चुके हैं. इस वर्ष के चुनाव में भी विभिन्न दल से इस गांव के कई नामों की चर्चाएं राजनीतिक गलियारे में तैर रही है.


पूनम देवी यादव (जदयू)

खगड़िया विधान सभा क्षेत्र के वर्तमान विधायक पूनम देवी यादव जदयू से नाता रखतीं हैं. वे लगातार तीन बार इस सीट से जदयू की टिकट पर जीत का परचम लहरा चुकी हैं. इसके पूर्व फरवरी 2005 के चुनाव में लोजपा की टिकट पर भी वे इस सीट से जीत हासिल कर चुकी हैं. पूनम देवी यादव के नाम खगड़िया विधान सभा क्षेत्र का सबसे लंबे समय तक प्रतिनिधित्व करने का रिकार्ड है. वे इसी विधान सभा क्षेत्र से चर्चित निर्दलीय विधायक रहे रणवीर यादव की पत्नी हैं. उल्लेखनीय है कि वर्ष 1990 में रणवीर यादव जेल से ही चुनाव लड़े थे और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर तमाम राजनीतिक दलों के प्रत्याशी को मात देते हुए जिले की राजनीति में सनसनी फैला दी थी. उस वक्त रणवीर यादव के चुनावी अभियान की कमान उनकी पत्नी पूनम देवी यादव के हाथ रहा था. दरअसल यह ही वो चुनाव था जो रणवीर यादव के चुनावी ताकत का एहसास विभिन्र राजनीतिक दलों के नेतृत्व को करा गया और माना जाने लगा कि उनकी पहुंच किसी खास राजनीतिक दल या जाति के वोट बैंक तक सीमित नहीं है. शायद यही कारण रहा कि बाद के दिनों के चुनाव में इस परिवार के पूनम देवी यादव पर पार्टी नेतृत्व एतवार करता रहा और चुनाव परिणाम के बाद हर बार दल के शीर्ष नेतृत्व व जनता के विश्वास पर वे खड़ी उतरती रहीं. बहरहाल आगामी चुनाव में एक बार फिर वर्तमान विधायक पूनम देवी यादव जदयू से टिकट की रेस में सबसे आगे हैं. 

 कृष्णा कुमारी यादव

बीते दिनों पूर्व विधायक रणवीर यादव की दूसरी पत्नी कृष्णा कुमारी यादव की एक बार फिर राजद में इंट्री हुई है. उल्लेखनीय है कि 2014 के संसदीय चुनाव में वे खगड़िया लोक सभा क्षेत्र से महागठबंधन समर्थित राजद की प्रत्याशी रही थी. वर्ष 2019 के चुनाव में भी उनके राजद से उम्मीदवार होने की काफी चर्चाएं थी. लेकिन महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग में यह संसदीय क्षेत्र वीआईपी कोटे में चले जाने से कृष्णा कुमारी यादव को टिकट से बंचित रहना पड़ा था. जिसके बाद उनके सीपीआई के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरने की चर्चाओं के बीच राजद ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था. हलांकि बाद में महागठबंधन के घोषित उम्मीदवार के खिलाफ उनके चुनाव लड़ने की चर्चाएं महज अफवाह साबित हुई. फिलहाल चुनावी साल में उनके राजद में फिर से शामिल होने से आगामी विधान सभा चुनाव में उनके उम्मीदवारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं. हलांकि इस संदर्भ में उनकी ओर से अभी तक कोई बयान नहीं आया है. लेकिन सूत्र बताते हैं कि उनकी नजर जिले के परबत्ता, बेलदौर सहित सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर की सीट पर हैं और पार्टी हाई कमान की हरी झंडी मिली तो वे इनमें से किसी एक सीट पर राजद उम्मीदवार के तौर पर नजर आ सकती हैं. 

 सुशांत यादव

कभी युवा लोजपा के जिलाध्यक्ष रहे सुशांत यादव की नजर भी आगामी विधानसभा चुनाव नें राजद से टिकट पर है. उन्होंने वर्ष 2015 में लोजपा के टिकट वितरण प्रणाली से नाराज होकर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 में लोजपा ने सुशांत यादव की मां सुशीला देवी को खगड़िया विधान सभा क्षेत्र से पार्टी की उम्मीदवार थीं. हलांकि उस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली थी. वर्ष 2015 के चुनाव में एनडीए के घटक दलों में से खगड़िया की सीट हम एवं बेलदौर की सीट लोजपा के कोटे में रही थी और सुशांत की चाहत इन दोनों में से किसी एक सीट पर से चुनावी मैदान में उतरने की रही थी. लेकिन लोजपा के हिस्से में आई बेलदौर की सीट पर पार्टी सुप्रिमों के द्वारा मिथलेश कुमार निषाद को मैदान में उतारने से नाराज सुशांत यादव ने पार्टी छोड़ दिया था. हलांकि लोजपा छोड़ने के बाद सुशांत यादव किसी राजनीति दल में विशेष रूप से सक्रिय नहीं रहे हैं. लेकिन सुशांत यादव का जिले के बेलदौर विधान सभा से भी चुनावी राजनीतिक संबंध रहा है. उनकी मां सुशीला देवी इस क्षेत्र ही से वर्ष 2006 में जिला परिषद सदस्य रह चुकी है.

वहीं वर्ष 2005 के दोनों ही चुनावों में उनके पिता भरत यादव कोशी विकास पार्टी से चुनाव लड़ चुके हैं. इस बीच त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उन्होंने अपनी पत्नी कुमारी श्वेता भारती को जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज कर जिले की राजनीति में एक धमक पैदा कर चुके है. बहरहाल राजनीतिक गलियारे में चल रही चर्चाओं पर यदि विश्वास करें तो सुशांत यादव की नजर बेलदौर विधानसभा क्षेत्र से राजद सहित महागठबंधन के घटक दलों पर टिकी हुई है और इसके लिए उनकी कवायद तेज है. इसके अतिरिक्त भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रवक्ता डॉ सलील कुमार व राजद नेता संजय यादव की नजर भी उम्मीदवारी को लेकर अपनी-अपनी पार्टी के टिकट पर बनी हुई है.

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