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NH-31 पर रफ्तार का कहर, मुखिया के भाई की मौत

लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : जिले में नेशनल हाईवे-31 (NH-31) एक बार फिर रक्त रंजित हुआ है। पसराहा के पास हुए एक भीषण सड़क हादसे में देवठा पंचायत के मुखिया आलोक कुमार के भाई की असामयिक और दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में कोहराम मच गया है और मृतक के परिवार में चीख-पुकार मची है। इस हादसे ने स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

तीन महीने में 100 से अधिक मौतें, ‘डेथ जोन’ बना हाईवे

स्थानीय स्तर पर जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, खगड़िया-पसराहा मार्ग पर सड़क हादसे अब आम हो चुके हैं। पिछले महज तीन महीनों के भीतर इस खतरनाक स्ट्रेच पर 100 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह एनएच अब हाईवे नहीं, बल्कि लोगों के लिए भय और असुरक्षा का पर्याय बन चुका है। लगातार हो रही इन मौतों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और जिला प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीएम सम्राट चौधरी और प्रशासन से बड़ी मांगें

बढ़ते हादसों को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और पथ निर्माण विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। जनहित में निम्नलिखित ठोस कदम उठाने की अपील की गई है:
स्पीड लिमिट पर सख्ती: एनएच पर वाहनों की गति सीमा तय कर उसकी सख्ती से निगरानी की जाए।
सुरक्षा संकेतक: दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) को चिह्नित कर वहां स्पीड ब्रेकर और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
लाइटिंग व्यवस्था: रात के अंधेरे में होने वाले हादसों को रोकने के लिए पर्याप्त स्ट्रीट लाइट्स लगाई जाएं।
एक्सीडेंट-प्रोन ज़ोन: खगड़िया से पसराहा तक के पूरे हिस्से को आधिकारिक रूप से ‘एक्सीडेंट-प्रोन ज़ोन’ (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) घोषित किया जाए।
ट्रॉमा सेंटर की स्थापना: हादसे के बाद घायलों को तुरंत ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज मिल सके, इसके लिए क्षेत्र में एक सर्वसुविधायुक्त ट्रॉमा सेंटर स्थापित हो।

“सड़क दुर्घटनाएं केवल आंकड़े नहीं होतीं, बल्कि किसी हंसते-खेलते परिवार के उजड़ जाने की दर्दनाक कहानी होती हैं। प्रशासन को अब जागना होगा।”स्थानीय नागरिक

आम जनता से भी नियमों के पालन की अपील

विज्ञप्ति के जरिए प्रशासन के साथ-साथ आम वाहन चालकों से भी जिम्मेदारी दिखाने की अपील की गई है। लोगों से कहा गया है कि वे सड़क सुरक्षा नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करें। दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और चारपहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट का उपयोग जरूर करें, क्योंकि थोड़ी सी सतर्कता कई जिंदगियां बचा सकती है।

डॉ. संजीव कुमार ने घटना पर व्यक्त किया गहरा दुख

घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए डॉ. संजीव कुमार ने जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इस मार्ग को ‘मौत का हाईवे’ बताते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों में इस रूट पर 100 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन संबंधित विभाग किसी बड़ी त्रासदी के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

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