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मेडिकल संस्थान में पुलिसिया कार्रवाई पर उठे सवाल, क्या नियमों को ताक पर रखकर की गई ‘जांच’?

लाइव खगड़िया‌ : स्थानीय ‘श्यामलाल चंद्रशेखर पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट’ में पुलिस की एंट्री को लेकर विवाद गहरा गया है। एक तरफ जहाँ खगड़िया पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपनी कार्रवाई को नियमानुसार बताया है, वहीं दूसरी ओर संस्थान प्रशासन ने पुलिसिया कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पुलिस का पक्ष: ‘शिकायत के आधार पर हुई जांच’

​खगड़िया पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक 15.01.2026) के अनुसार, गृह मंत्रालय (भारत सरकार) को प्राप्त एक पीड़िता के आवेदन के आलोक में महिला पुलिस अधिकारी द्वारा संस्थान में जांच की गई थी। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके बाद 12 जनवरी 2026 को खगड़िया थाना में कांड संख्या 19/2026 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को भ्रामक बताते हुए इसे अपनी छवि धूमिल करने की कोशिश करार दिया है।

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संस्थान के चेयरमैन का सवाल: बिना FIR और वारंट के प्रवेश कितना जायज?

मामले में सबसे बड़ा पेच ‘प्रक्रिया’ को लेकर है। संस्थान के चेयरमैन डॉ स्वामी विवेकानंद का कहना है कि यदि पुलिस की कार्रवाई 11 जनवरी को हुई और FIR 12 जनवरी को दर्ज की गई, तो यह सीधे तौर पर विधिक प्रक्रिया का उल्लंघन प्रतीत होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि

  • संवैधानिक मर्यादा: कानून के अनुसार, बिना किसी वैध FIR या मजिस्ट्रेट के सर्च वारंट के किसी भी शैक्षणिक संस्थान या निजी परिसर में प्रवेश नहीं किया जा सकता, जब तक कि मामला किसी की जान बचाने या तत्काल गंभीर अपराध से जुड़ा न हो।
  • छात्रावास के नियम: महिला छात्रावास में प्रवेश के समय महिला वार्डन की उपस्थिति और लिखित आदेश अनिवार्य हैं। बिना अनुमति कमरे बंद कर पूछताछ करना न केवल ‘निजता के अधिकार’ (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है, बल्कि छात्राओं के मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।

दहशत में छात्राएं: सुरक्षा या मानसिक प्रताड़ना?

संस्थान के चेयरमैन डॉ स्वामी विवेकानंद का कहना है कि छात्राओं के बीच व्याप्त भय का माहौल पुलिस के ‘संवेदनशील’ होने के दावों पर सवाल उठाता है। प्रेस विज्ञप्ति में पुलिस अपनी कार्रवाई को ‘जन-जन की सेवा’ बता रही है, लेकिन धरातल पर छात्राओं का सहमा होना यह दर्शाता है कि कार्रवाई के दौरान महिला सुरक्षा के मानकों की अनदेखी की गई।

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