लाइव खगड़िया : जिले में पुलिस प्रशासन और पत्रकारिता के बीच तथ्यों को लेकर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। एक ओर खगड़िया पुलिस ने दैनिक भास्कर की खबर का औपचारिक खंडन किया है, तो दूसरी ओर ‘दैनिक भास्कर’ के जिला प्रभारी चंदन चौहान अपने रिपोर्टर और प्रत्यक्षदर्शियों के साक्ष्यों के साथ अपनी खबर पर कायम है।
दरअसल महाशिवरात्रि मेले के दौरान जिले के मानसी थाना क्षेत्र के रोहियार में हुई घटना ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। जहाँ जिला पुलिस इसे ‘वर्चस्व की लड़ाई’ बता रही है, वहीं समाचार पत्र इसे ‘स्मैक विवाद’ से जुड़ा मामला बता रहा है।
1. खगड़िया पुलिस का आधिकारिक पक्ष (खंडन)
खगड़िया पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक 17.02.2026) के अनुसार, समाचार पत्र में प्रकाशित खबरें भ्रामक हैं। पुलिस का मुख्य तर्क निम्नलिखित है:
- जांच रिपोर्ट: वरीय पदाधिकारियों द्वारा की गई जांच में यह पाया गया कि घटना वर्चस्व को लेकर हुए विवाद के कारण हुई थी, न कि स्मैक विवाद के कारण।
- आधिकारिक पुष्टि का अभाव: पुलिस का कहना है कि खबर प्रकाशित करने से पहले प्रशासन से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।
2. ‘दैनिक भास्कर’ का पक्ष और जवाबी तर्क
अखबार ने पुलिस के खंडन को सिरे से खारिज करते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। भास्कर के जिला प्रभारी का मुख्य दावा इस प्रकार हैं:
- घायल का बयान: अखबार का कहना है कि घायल व्यक्ति का वीडियो और बयान उनकी खबर की पुष्टि करता है। पीड़ित ने स्वयं घटना के पीछे के कारणों का उल्लेख किया है।
- प्रत्यक्षदर्शी रिपोर्टिंग: घटना के समय रिपोर्टर स्वयं मौके पर मौजूद था और यह आंखों देखी घटना पर आधारित रिपोर्ट है।
- प्रशासनिक अनदेखी: मामले की जानकारी के लिए कल एसडीओ (सदर) से संपर्क करने का प्रयास किया था, लेकिन अधिकारी ने फोन नहीं उठाया।
- पक्षपात का आरोप: भास्कर का तर्क है कि यही खबर अन्य संस्थानों ने भी चलाई, लेकिन पुलिस ने केवल उन्हें निशाना बनाया। उनका कहना है कि यह प्रशासन की अपनी “कमजोरी छुपाने” और मीडिया पर “लांछन लगाने” की कोशिश है।
बहरहाल पुलिस घटना के अन्य बिंदुओं पर गहनता से जांच कर रही है। मामला अब साक्ष्यों के टकराव का है—जहाँ एक तरफ पुलिस की आधिकारिक जांच रिपोर्ट है, वहीं दूसरी तरफ मीडिया के पास पीड़ित के बयान और वीडियो साक्ष्य होने का दावा है।
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