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उम्मीदों की नई रोशनी,आदर्श की आवाज देगी बॉलीवुड में दस्तक




लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : वैसे तो कुदरत ने आदर्श को बहुत ही खूबसूरत आवाज दी थी, लेकिन तंगहाली की जीवन देकर मानों उनकी परीक्षा भी ले रहा था. बावजूद इसके जिद व जुनून के इस्पात में ढ़ले हौंसले के साथ संगीत के क्षेत्र में कुछ कर गुजरने की तमन्नाओं ने उन्हें आज उस मुकाम पर पहुंचा ही दिया, जहां से उनके उम्मीदों की दीपक को एक नई रोशनी मिल सके और बहुत ही जल्द आदर्श की आवाज बॉलीवुड में दस्तक दे सकता है.

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दरअसल आदर्श का इस मुकाम तक पहुंचने का अबतक का सफर इतना आसान भी नहीं रहा है. उनके घर ना तो म्यूजिक सिस्टम था, ना ही टेलीविजन और ना ही संगीत का कोई गुरू का ही उन्हें मार्गदर्शन प्राप्त था. यदि उनके पास उस वक्त कुछ था तो बस उनकी आवाज और उनका जुनून. राह चलते संगीत की धुन सुनाई पड़ते ही वहां रूककर उस गीत से कुछ सीखने की ललक उनके लगन को बयां करता था.

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बात वर्ष 2013 की है जब कोलकाता में सोनी टीवी के लिए इंडियन आइडल जूनियर के प्रतिभागियों का चयन प्रक्रिया अंतिम दौर चल रहा था. जिसमें बॉलीवुड के म्यूजिक डायरेक्टर विशाल, शेखर एवं सिंगर श्रैया घोसाल को प्रतिभाओं का चयन करना था. दोस्तों से जानकारी मिलने पर आदर्श पटना से चयनित होकर कोलकाता पहुंचा और बॉलीवुड के स्टार के सामने अपनी गायन कला का प्रदर्शन किया. हलांकि उस वक्त उनका इंडियन आइडल जूनियर के लिए चयन नहीं हो सका. लेकिन उनकी आवाज से जजों की टीम इतने प्रभावित हुए कि उनके गायन कला को तराशने का फैसला लिया गया और उन्हें स्कोलरशिप देने की अनुशंसा की गई.




जिसके उपरांत कोलकाता के इंयियन आइडल एकेडमी में उनका दाखिला हुआ. जहां वे सिंगर दीप चक्रवर्ती से आज भी गायन का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. साथ ही उन्हें आधा दर्जन सिंगर एवं म्यूजिक डायरेक्टर का मार्गदर्शन मिलता रहा है. इस बीच चार एलबम में वे अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं और विभिन्न मंचों पर कई सम्मान भी उनके नाम रहा है. बताया जाता है कि गायन की तकनीकी विधा से अपनी आवाज को तराशने के बाद आदर्श बॉलीवुड की दुनिया में कदम रखने की तैयारी में हैं.

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वर्ष 2013 में 13 वर्ष की उम्र में आदर्श कुमार एक प्रतिभागी के रूप में इंडियन आइडल जूनियर में भाग लिया था. शहर के थाना रोड निवासी संजय कुमार गुप्ता व अनिता देवी के पुत्र आदर्श कुमार गरीबी के मंजर से बाहर निकल आज शौहरत की बुलंदियों को छूने की राह पर निकल चुके हैं और इसके लिए वो काफी मेहनत कर रहे हैं. आदर्श कुमार के पिता शहर के एक मिठाई की दुकान में काम करते हैं और मां एक सरकारी विद्यालय में रसोईया के पद पर कार्यरत हैं. चार भाईयों एवं एक बहन में से दूसरे स्थान पर रहे आदर्श का हिन्दी, भोजपुरी, अंगिका के साथ-साथ अब बंगला पर भी अच्छी पकड़ बन चुका है. बताया जाता है कि संगीत से उनका लगाव बचपन से ही रहा है. इस क्रम में वे जिले के गायत्री शक्तिपीठ मंदिर में प्रतिदिन भजन कीर्तन में भाग लेते रहे थे.


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