लाइव खगड़िया : नगर परिषद खगड़िया की नई सशक्त स्थायी कमिटी का गठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत संपन्न हो गया है। पांच सदस्यीय इस टीम में चार सदस्यों का निर्विरोध और एक सदस्य का चुनाव के माध्यम से चयन होना स्थानीय लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है। इस नई कमिटी के गठन के साथ ही अब शहरवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता अमरीष कुमार ने नई कमिटी को बधाई देते हुए नगर परिषद की कार्यशैली को पारदर्शी, जवाबदेह और जनकेंद्रित बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जनता की अपेक्षा केवल बैठकों से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाले परिणामों से है। कमिटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्यों को गति देना और वित्तीय अनुशासन लाना है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने नई सशक्त कमिटी की पहली बैठक के लिए 5 सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियां और उनके समाधान का खाका पेश किया है, जिसमें कमिटी के पांचों सदस्यों को एक-एक विषय की जिम्मेदारी सौंपने का सुझाव दिया गया है:
1. सफाई व्यवस्था में वित्तीय अनियमितता पर रोक और वैकल्पिक मॉडल
अमरीष कुमार ने साफ-सफाई व्यवस्था की समीक्षा को सबसे पहली प्राथमिकता बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस कार्य को लगभग 20,000 रुपये से कम में किया जा सकता है, उसके लिए प्रति वार्ड 1.5 लाख से 1.8 लाख रुपये तक का भुगतान क्यों हो रहा है?
सुझाव: श्रम, उपकरण लागत और उचित मुनाफे को जोड़कर प्रति वार्ड 50,000 रुपये मासिक का एक वैकल्पिक सफाई मॉडल तैयार किया जाए। इससे नगर परिषद के करोड़ों रुपये बचेंगे, जिनका उपयोग सड़क, नाला, स्ट्रीट लाइट और जलनिकासी जैसे बुनियादी कार्यों में होगा। जवाबदेही के लिए वार्ड पार्षद और नागरिक समूहों की निगरानी प्रणाली बनाई जाए।

2. टैक्स निर्धारण में पारदर्शिता और ‘कम कमीशन’ आधारित व्यवस्था
वर्तमान में बाहरी एजेंसियों को लगभग 10% कमीशन देकर टैक्स वसूली कराई जा रही है, जिससे प्रशासनिक खर्च बढ़ रहा है। साथ ही अधिक टैक्स निर्धारित कर बाद में उसे कम करने के नाम पर भ्रष्टाचार की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
सुझाव: बाहरी एजेंसियों के बजाय पूर्व की भांति महज 4% कमीशन पर ‘टैक्स दारोगा प्रणाली’ को दोबारा बहाल किया जाए। इसके अतिरिक्त, जब तक वार्डों में नियमित पेयजल गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, तब तक पानी आपूर्ति शुल्क को टैक्स में शामिल न किया जाए।
3. ‘घाट पर हाट’ और वेंडिंग कॉम्प्लेक्स से छोटे दुकानदारों को राहत
अनियोजित बाजार व्यवस्था के कारण शहर में जाम और अतिक्रमण की समस्या आम हो चुकी है, जिससे फुटपाथ और छोटे विक्रेता सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
सुझाव: नगर परिषद कार्यालय या अन्य उपयुक्त स्थलों पर बहुमंजिला वेंडिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाए। साथ ही, शहर के बायपास बांध सड़क के किनारे घाटों पर “घाट पर हाट मॉडल” विकसित किया जाए, जिससे स्थानीय व्यापार, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
4. एमजी रोड को जाम से मुक्ति दिलाने हेतु पैरेलल रोड नेटवर्क
मुख्य मार्ग (एमजी रोड) पर लगातार रहने वाले जाम से शहर की आर्थिक और सामाजिक गतिविधि प्रभावित हो रही है।
सुझाव: ओवरब्रिज के बगल से हाजीपुर, जयप्रकाश नगर होते हुए रेलवे लाइन के किनारे बलुआही तक सड़क का चौड़ीकरण और जीर्णोद्धार किया जाए। यह समानांतर (पैरेलल) सड़क नेटवर्क मुख्य मार्ग पर दबाव कम करेगा और आपातकालीन सेवाओं को सुलभ बनाएगा।

5. कल्याणकारी योजनाओं का सरलीकरण और गरीबों को सीधा लाभ
प्रधानमंत्री आवास योजना और कबीर अंत्येष्टि जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ जटिल प्रक्रियाओं के कारण अक्सर पात्र और जरूरतमंद लोगों तक समय पर नहीं पहुंच पाता है।
सुझाव: पात्रता की जांच को सख्त रखते हुए, कागजी और प्रक्रियात्मक बाधाओं को सरल बनाया जाए ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति को अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े।
आगे की राह:
सामाजिक कार्यकर्ता अमरीष कुमार का मानना है कि नई सशक्त स्थायी कमिटी केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं है, बल्कि यह नगर परिषद की नीतिगत दिशा तय करने वाली संस्था है। यदि यह कमिटी वित्तीय अनुशासन और प्राथमिकता आधारित विकास मॉडल को अपनाती है, तो खगड़िया आने वाले समय में बेहतर शहरी प्रशासन (Urban Governance) का एक बेजोड़ उदाहरण बन सकता है। अब देखना यह है कि नई कमिटी इन गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए क्या कदम उठाती है।
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