लाइव खगड़िया : जिला पुलिस ने माननीय न्यायालय को गुमराह करने की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एक ऐसे फर्जी अभियुक्त को गिरफ्तार किया है जो किसी और के स्थान पर कोर्ट में आत्मसमर्पण करने पहुंचा था। इस मामले में पुलिस ने जालसाजी में साथ देने वाले दो फर्जी बेलरों (जमानतदारों) को भी दबोचा है।
क्या है पूरा मामला?
घटना 21 फरवरी 2026 की है। न्यायिक दंडाधिकारी (प्रथम श्रेणी)-सह-सिविल जज श्री शशांक कुमार की अदालत में दीपक कुमार के नाम पर एक व्यक्ति ने आत्मसमर्पण किया और धारा 482(2) BNSS के तहत शपथ-पत्र दाखिल किया।
दस्तावेजों की जांच के दौरान न्यायालय को शपथ-पत्र पर संदेह हुआ, जिसके बाद अदालत ने सत्यापन के लिए साइबर थाना को निर्देशित किया।
पुलिस जांच में खुला राज
जब साइबर थाना पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो परतें खुलती चली गईं। पुलिस के सामने सच आया कि जो व्यक्ति खुद को दीपक कुमार बताकर पेश हुआ था, उसका असली नाम राजेश कुमार है। वह साइबर थाने में दर्ज एक मामले के मुख्य अभियुक्त दीपक कुमार के स्थान पर फर्जी तरीके से बॉन्ड भरने आया था।
सत्यापन के दौरान दो अन्य लोगों की पहचान भी फर्जी जमानतदारों के रूप में हुई:
- लुखो देवी (66 वर्ष) – फर्जी जमानतदार।
- विशुनदेव सिंह (65 वर्ष) – फर्जी पहचानकर्ता।
ये सभी आरोपी खगड़िया जिले के महेशखूंट थाना क्षेत्र के धर्मपुर बन्नी गांव के रहने वाले हैं।
कानूनी कार्रवाई
इस धोखाधड़ी के मामले में चित्रगुप्तनगर थाना में कांड संख्या 30/26 दर्ज की गई है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया है और उनके आपराधिक इतिहास की जांच की जा रही है। आरोपियों के खिलाफ BNSS की विभिन्न गंभीर धाराओं (319(2), 318(4), 338, 338(3), 340(2)/3(5)) के तहत मामला चलाया जा रहा है।
छापेमारी दल में शामिल अधिकारी
पुलिस की कार्रवाई में साइबर थाना के पुलिस उपाधीक्षक श्री निशांत गौरव के नेतृत्व में पु०नि० श्वेता भारती, पु०नि० समरेन्द्र कुमार, पु०अ०नि० अरुण कुमार झा (चित्रगुप्तनगर थाना), और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।
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