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परबत्ता

गंगा नदी के तटीय इलाकों का होगा कायाकल्प, टर्मिनल व यात्री सुविधाओं का निर्माण तेज

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लाइव खगड़िया : गंगा नदी में जल मार्ग विकास परियोजना के तहत बिहार के दियारा क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की कवायद तेज हो गई है। अगुवानी, सुल्तानगंज और कहलगांव-तीनटंगा के बीच न केवल यातायात व्यवस्था सशक्त की जा रही है, बल्कि यात्रियों और किसानों के लिए स्थायी बुनियादी ढांचा भी विकसित किया जा रहा है।

प्रमुख विकास कार्य और सुविधाएं

डेढ़ वर्ष पूर्व इन क्षेत्रों में फ्लोटिंग जेटी (तैरता हुआ घाट) का निर्माण पूरा होने के बाद अब वहां स्थायी सुविधाओं पर काम शुरू हो गया है। सुल्तानगंज और कहलगांव में लगभग दो-दो एकड़ क्षेत्र में भव्य यात्री सुविधा केंद्र बनाए जा रहे हैं। इन केंद्रों में निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
यात्री सुविधाएं: छायादार प्रतीक्षालय, आधुनिक सार्वजनिक शौचालय और टिकट बुकिंग काउंटर।
प्रशासनिक ढांचा: सुचारू संचालन के लिए प्रशासनिक कक्ष और रात में प्रकाश हेतु सोलर लाइट की व्यवस्था।
व्यापारिक लाभ: किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए भंडारण क्षेत्र (Storage Area) विकसित किया जा रहा है, ताकि वे अपनी उपज को सुरक्षित रख सकें।
परिवहन: वाहनों के व्यवस्थित संचालन के लिए पार्किंग जोन का निर्माण।

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किसानों और व्यापारियों को मिलेगी नई संजीवनी

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ दियारा क्षेत्र के किसानों को होगा। अब तक परिवहन और भंडारण के अभाव में उपज को बाजार तक ले जाना एक बड़ी चुनौती थी। स्थायी जेटी और भंडारण केंद्रों के बनने से किसान सीधे बाजार से जुड़ सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद है।

तीनटंगा में कटाव के बाद नई जगह की तलाश

भारतीय जलमार्ग प्राधिकरण के अनुसार, तीनटंगा दियारा में पूर्व में चिह्नित की गई जमीन गंगा के कटाव में समा गई थी। अधिकारियों ने बताया कि अब नई जगह चिह्नित कर निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अगुवानी की तरफ नवनिर्मित पुल के स्पर के पास भी परियोजना को गति दी जा रही है।

परियोजना का व्यापक लक्ष्य

राष्ट्रीय जलमार्ग पर कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए यह केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है।

कुल प्रस्तावित सामुदायिक जेटी (राष्ट्रीय स्तर पर): 36
परियोजना की कुल अनुमानित लागत: 736 करोड़ रुपये
बिहार में प्रस्तावित कुल जेटी: 21
बिहार में अब तक पूर्ण निर्माण: 18

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