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56 भोग लगाकर मनाया गया स्वामी आगमानंद जी महाराज का 54वां अवतरणोत्सव

लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : उत्तरतोताद्रि मठ विभीषणकुंड अयोध्या के उत्तराधिकारी व श्रीशिवशक्ति योग पीठ नवगछिया के पीठाधीश्वर परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज का अवतरणोत्सव धूमधाम से मनाया गया. सहरसा कॉलेज, सहरसा के मैदान में श्री शिवशक्ति योग पीठ नवगछिया के तत्वाधान में आयोजित भव्य तीन दिवसीय अवतरणोत्सव के तीसरे दिन स्वामी जी के अनुयाईयों के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भव्य धर्म मंच एवं भव्य पंडाल का निर्माण कराया गया था. वहीं प्रथम चरण में योगासन, वेदी पूजन किया गया. जिसके बाद परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज के आगमन पर अनुयाईयो एवं भक्तों के द्वारा गाजे-बाजे के साथ स्वामी जी को रथ पर सवार कर पुष्प वर्षा करते हुए मंचासीन किया गया. तत्पश्चात योगपीठ के विद्वान पंडित आचार्य कौशलेंद्र झा, अनिरुद्ध शास्त्री, मनमोहन झा, कपीश, हरिनारायण के साथ गुरू धाम एवं विभिन्न जगहों से पहुंचे पंडित एवं आचार्यो के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गुरू पूजन, पादुका पूजन के साथ 56 स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग लगाया गया. वहीं मंच पर विराजमान स्वामी से लोगों ने कतारबद्ध एवं अनुशासित ढंग से आशीर्वाद प्राप्त किया.

मौके पर योग पीठ से जुड़े नामचीन कलाकारों के द्वारा एक से बढ़कर एक भजन की प्रस्तुति दी गई. वहीं मानस कोकिला कृष्ण दीदी, भजन सम्राट डॉ दीपक मिश्रा, हिमांशु, प्रो डॉ ज्योतिंद्र चौधरी, प्रो नृपेंद्र वर्मा, मृत्युंजय सिंह गंगा ने गुरू की महिमा एवं भगवान श्रीराम के चरित्र का वर्णन किया. जबकि बनारस से पहुंचे प्रसिद्ध कथावाचक हीरामणि ने भी संगीत के साथ भगवान श्रीराम एवं स्वामी जी के जन्मोत्सव पर विस्तार पूर्वक चर्चा किया. साथ ही दिव्यांश कला केंद्र भागलपुर के छात्र-छात्राओं के नृत्य नाटक प्रस्तुत किया.

इस अवसर पर शाम को परमहंस स्वामी आगमानद जी महाराज ने अपने मुखारविंद से आशीर्वचन देते हुए कहा कि संतों की कृपा हो तो भगवान को भी कृपा करनी होती हैं. संत सबों के हैं उनका अपना घर परिवार नहीं होता हैं. समस्त जन मानस ही उनका परिवार है. क्योंकि संतों की कृपा भगवान की कृपा से बड़ी होती है. इसलिए जब-जब जीव के जीवन में संकट आए तो उन्हें संतों के चरणों में जाना चाहिए. क्योंकि संतों की कृपा से हर संकट को टाला जा सकता है और संतों की कृपा से ही भगवान की प्राप्ति होती है. स्वामी जी ने भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संपूर्ण विश्व में रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव घर-घर में लोग धूमधाम से मनाते आ रहे हैं. मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं. जिन्होंने ‘रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाय पर वचन न जाय’ का पालन किया. इसलिए भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है. क्योंकि उन्होंने कभी भी कहीं भी जीवन में मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया. माता-पिता और गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए वे ‘क्यों’ शब्द को कभी भी मुख पर नहीं लाए. ऐसे में वे एक आदर्श पुत्र, शिष्य, भाई, पति, पिता और राजा बने. जिनके राज्य में प्रजा सुख-समृद्धि से परिपूर्ण थी. बस जरूरत है आज उनके मार्ग पर चलने की. अंत में स्वामी जी जन कल्याण के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए सबों का आशीर्वाद दिया.

बतातें चलें कि तीन दिनों तक भक्ति की सरिता बहती रहीं। सहरसा महोत्सव कमेटी के सभी सदस्यों ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने में दिन-रात एक कर दी. व्यापक व्यवस्था व सफल आयोजन के लिए दूर पहुंचे लोगों ने कमेटी के सदस्यों के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया.

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