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नगर परिषद चुनाव के बीच मनीष का मास्टर स्ट्रोक, क्या हैं इसके मायने

लाइव खगड़िया : शहर में नगर परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है और नगर सभापति की कुर्सी को लेकर शह व मात का खेल जारी है. हलांकि आरक्षण रोस्टर के तहत नगर सभापति की कुर्सी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो जाने के बाद शहर के कई राजनीतिक धुरंधरों के आरमानों पर पानी फिर गया है. लेकिन इनमें से कुछ चर्चित नाम चुनावी राजनीति के एक विषम परिस्थिति में हवाओं का रूख बदल देने के लिए अपनी ताकत झोंक दी है. इन नामों में एक नाम शिक्षक नेता मनीष कुमार सिंह का भी है. जिन्होंने आज नगर परिषद चुनाव के बीच शिक्षक पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर राजनीतिक मैदान में मास्टर स्ट्रोक खेल दी है.

दरअसल, चर्चाएं है कि नगर निकाय चुनाव की घोषणा होने के पूर्व से ही शिक्षक नेता मनीष कुमार सिंह ने नगर की राजनीति में अपनी भूमिका तय रखी थी और नगर सभापति चुनाव को लेकर उनकी तैयारी भी जारी था. लेकिन नगर सभापति पद के लिए जारी आरक्षण रोस्टर ने उनकी मुहिम का रूख बदल दिया. नगर सभापति की कुर्सी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो जाने के बाद शिक्षक नेता मनीष कुमार सिंह ने अपने विश्वस्त सहयोगी ज्योतिष कुमार की पत्नी अर्चना कुमारी को चुनावी मैदान में खड़ा कर खुद किंग मेकर की भूमिका में आ गए. इस बीच शिक्षक नेता मनीष नगर सभापति पद के प्रत्याशी अर्चना कुमारी के समर्थन में खुलकर सामने आ गये. लेकिन एक सरकारी कर्मी का किसी प्रत्याशी के चुनाव प्रचार में शामिल होना विभाग को नागवार गुजरा और उनसें स्पष्टीकरण की मांग कर दी गई. लेकिन नियोजित शिक्षक मनीष कुमार सिंह मामले में स्पष्टीकरण का जवाब देने की जगह पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर चर्चाओं में आ गए.

राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं पर यदि गौर करें नगर परिषद चुनाव के बीच मनीष कुमार सिंह का शिक्षक पद से इस्तीफा देना एक सोच-समझ कर लिया गया फैसला है और इसके कई मायने है. बताया जाता है कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा बढ़ी है और उनकी नजर आगामी विधानसभा चुनाव पर है. ऐसे में वे खुद को महज एक शिक्षक नेता के तौर पर वे नहीं रख सकते थे और उन्हें चुनावी राजनीति में खुद को साबित करने के लिए एक अवसर की भी तलाश थी. हलांकि उनकी पत्नी को लगातार दूसरी बार जिला परिषद सदस्य पद पर सफलता मिल चुकी है. लेकिन इस जीत को वो सुर्खियां नहीं मिल सकी, जो उनके राजनीतिक महत्वाकांक्षा को नई उड़ान दे सके. निश्चय ही शिक्षक के तौर पर एक सरकारी कर्मी होना भी उनके राजनीतिक राह में एक रोड़ा साबित हो रहा था और पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर आज उन्होंने खुद को इस अरचन से दूर कर लिया है.

बहरहाल नगर सभापति पद के चुनाव में मनीष की मुहिम कितना रंग लाता है, यह तो वक्त ही बतायेगा. लेकिन इतना तो तय है कि चुनाव के बाद जनसरोकार के मुद्दे को लेकर उनके तेवर और भी तल्ख रहेंगे. जिसकी एक बानगी शिक्षक पद से इस्तीफा की घोषणा को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दिखी. जहां उन्होंने विभिन्न मुद्दों को लेकर सिस्टम, प्रशासनिक अधिकारी से लेकर मीडियाकर्मियों तक को भी नहीं छोड़ा. वहीं तू खींच मेरी फोटू…जैसे शब्दों के साथ उनका आक्रामक अंदाज भी दिखा.

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