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हर ‘बोलता खगड़िया’ रविकांत चौरसिया नहीं हो सकता और ना ही हर ‘लाइव खगड़िया’…

लाइव खगड़िया : क्षेत्र चाहे कोई भी रहा हो, हर सफलता के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी छिपी होती है और वर्षों की मेहनत से एक मुकाम को हासिल किया जाता है. यह भी एक सच्चाई है कि शॉर्टकट से कुछ हासिल नहीं होता. बावजूद इसके कुछ लोग डिजिटल की दुनिया में शॉर्टकट का रास्ता अख्तियार कर लोगों के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश में जुटे हैं.

जिले में इन दिनों एक कथित गैंग सक्रिय है, जो कि जिले के चर्चित वेब पोर्टल व वेब चैनल से मिलते-जुलते नाम से डिजिटल की दुनिया में कदम रख कर लोगों के बीच ना सिर्फ भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं बल्कि उनकी साख पर बट्टा लगाने की कवायद में जुटे हैं. जिले के वेब की दुनिया में कई नाम चर्चित हैं और इन नामों में बोलता खगड़ियालाइव खगड़िया भी शुमार है. निश्चय ही हर व्यक्ति की अपनी शैली होती है और हर का अपना अंदाज होता है और शायद यह ही उनकी पहचान होती है. हर ‘बोलता खगड़िया‘ रविकांत चौरसिया नहीं हो सकता और ना ही हर ‘लाइव खगड़िया‘…

भ्रमजाल का यह गंदा खेल समाज को आईना दिखाने वाले एक शिक्षक अमलेन्द्र कुमार के नेतृत्व में हो रहा है. जो कि बेला सिमरी के बताये जाते हैं और उनके उसी क्षेत्र के एक स्कूल में पंचायत शिक्षक होने की बातें सामने आ रही है. ‘लाइव खगड़िया’ से मिलते जुलते नाम का डोमेन इनके आईडी से ही लिया गया है. जबकि रविकांत चौरसिया का ‘बोलता खगड़िया’ से मिलते नाम से एक पोर्टल भी ये ही चला रहे है. दिलचस्प है कि अमलेन्द्र कुमार जिले के चर्चित ‘बोलता खगड़िया’ व ‘लाइव खगड़िया’ डिजिटल प्लेटफार्म से अच्छी तरह से वाकिफ रहे हैं. बावजूद इसके डिजिटल के वृहत संसार से मिलते-जुलते इन्हीं दो नामों को चुन लाना उनकी मंशा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है और यदि उनकी इस करतूत को ब्लैकमेलिंग का धंधा कहा जाये तो शायद अतिशयोक्ति नहीं होगी.

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