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‘पीके’ की राह पर चल खगड़िया की राजनीति में उभर रहे ‘आरके’

लाइव खगड़िया : प्रशांत किशोर यानी राजनीति का ‘पीके’. भारतीय राजनीति के पारंपरिक ढर्रे को बदल कर सियासी हलकों में हलचल मचा देने वाले पीके एक कुशल चुनावी रणनीतिकार के तौर पर जाने जाते रहे हैं. पीके की तर्ज पर जिले के राजनीति में भी एक चेहरा तेजी से उभर रहा है और उन्हें नाम दिया जाने लगा है ‘आरके’. वर्षों तक सांसद चौधरी महबूब अली कैसर का स्थानीय प्रतिनिधि रहने वाले राकेश कुमार सिंह ने जब अपनी राहें जुदा कर ली तो जिले की राजनीति में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थी. कुछ दिनों तक चर्चाओं से ओझल रहने के बाद बेगूसराय-खगड़िया एमएलसी चुनाव के ठीक पहले वे तब चर्चाओं में आये जब परबत्ता विधायक डॉ संजीव कुमार की टीम में उनके शामिल होने की खबरें आई.

दरअसल उस वक्त वह दौर था जब विधायक डॉ संजीव कुमार अपने बड़े भाई राजीव कुमार के लिए एमएलसी चुनाव की तैयारियों में जुटे थे. चर्चाएं तो यह थी कि वे अपने भाई के लिए एनडीए का समर्थन चाहते थे. लेकिन भाजपा की सिटिंग सीट होने की वजह से ऐसा संभव नहीं हो सका. ऐसे में राजीव कुमार को कांग्रेस की समर्थन से मैदान में उतरना पड़ा. जबकि एनडीए ने भाजपा के निवर्तमान विधान पार्षद रजनीश कुमार को एवं राजद ने पूर्व नगर सभापति मनोहर कुमार यादव को मैदान में उतारा. निश्चय ही कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर राजीव कुमार के लिए यह चुनावी मुकाबला आसान नहीं था. दूसरी तरफ उनके भाई जदयू विधायक डॉ संजीव कुमार के लिए भी कुछ राजनीतिक बंदिशें थी. लेकिन राजीव कुमार के लिए टीम डॉ संजीव के राकेश कुमार सिंह लगातार मुहिम चलाते रहे और परिणाम भी उनके पक्ष में रहा. राजनीति के धुरंधरों को मात देते हुए पहली बार चुनावी मैदान में उतरे राजीव कुमार ने जीत दर्ज की. इस चुनाव में एक रणनीतिकार के रूप में राकेश कुमार सिंह की भी परीक्षा थी और वे उसमें सफल रहे.

हलांकि चुनावी रणनीतिकार के तौर पर राकेश कुमार सिंह का यह शुरूआती कदम है और आने वाले दिनों में उनका प्रदर्शन देखना दीगर होगा. वैसे अपने राजनीतिक विरोधियों पर सोशल मीडिया के माध्यम से प्रहार करने का भी उनका एक अलग अंदाज रहा है. बहरहाल वे परबत्ता विधायक डॉ संजीव कुमार एवं विधान पार्षद राजीव कुमार के प्रतिनिधि के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं.

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