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मायूस किसान की निगाहें अब कटिंग नर्सरी से खिलने वाले गेंदा फूल पर




लाइव खगडिया (मुकेश कुमार मिश्र) : जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत मथुरापुर पंचायत के कमलपुर गांव निवासी किसान राजेंद्र कुमार उर्फ रविन्द्र अलौली प्रखंड के बागमती नदी के समीप खैरी खुटहा पंचायत के दहमा बहियार में विगत दो वर्षों से गेंदा फूल की खेती करते आ रहे हैं. साल में चार माह बागमती बाढ़ की पानी का रिसाव एवं बारिश से जलजमाव की समस्या के बाबजूद भी किसान ने हिम्मत नहीं हारी और पारंम्परिक खेती से अलग हटकर नवम्बर 2019 में पश्चिम बंगाल से गेंदा का नर्सरी लाकर पांच कठ्ठा में खेती प्रारंभ किया. 2020 में गेंदा फूल की खेती से आमदनी ठीक-ठाक रहा. जिससे उत्साहित होकर उन्होंने इस बार डेढ़ एकड़ में गेंदा फूल की खेती की. लेकिन इस बार किसान को नर्सरी ने दगा दे दिया . इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है और कटिंग नर्सरी के सहारे अपनी पूंजी निकालने की जुगत लगा रहे हैं. बताया जाता है खेती में उन्होंने चालीस हजार से अधिक पूंजी लगा चुके हैं. किसान राजेंद्र कुमार बताते हैं कि गेंदा फूल की खेती के लिए अच्छे किस्म के नर्सरी, कृषि वैज्ञानिकों का सलाह, कीटनाशक दवाईयों का प्रबंध, सरकारी अनुदान जैसी सुविधाएं महत्वपूर्ण है. इसके अभाव में कृषक खेतों में पूंजी लगाकर फंस जाते हैं.


विगत दिनों सहायक निदेशक पौधा संरक्षण श्याम नंदन कुमार के द्वारा निरक्षण किया गया. निरक्षण के दौरान गेंदा फूल में अल्टरनारिया कवक (fungus) का प्रकोप को देखते हुए कृषक को कई सलाह के साथ साथ किटनाशक दवा के बारे में जानकारी दी. मौके पर सहायक निदेशक उधान मो.जावेद भी उपस्थित थे. लेकिन किसान ने बताया कि गेंदा के पौधा एवं फूल के लिए कीटनाशक जो लोकल स्तर पर प्राप्त होता है, वह कारगर नहीं है. लेकिन पश्चिम बंगाल से मंगवाई दवा कारगर साबित होता है. लेकिन यह मंहगी हो जाती है. साथ ही उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल की तर्ज पर यगि प्रशासनिक सहयोग मिले तो गेंदा को फूलों की खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा हो सकतै है. वो बताते है कि गेंदा की दो सामान्य प्रजनन विधियां हैं, प्रथम बीज द्वारा तथा दूसरी कटिंग द्वारा. बीज के द्वारा सामान्यत: गेंदा की खेती की जाती है और इससे उगाई जाने वाली फसल में पौधे अधिक ऊंचे होने के साथ ही अधिक पुष्प देते हैं. जबकि कटिंग को प्रजाति की शुद्धता बनाये रखने हेतु ही अधिकांशत: उपयोग में लाया जाता है. गेंदा के फूलों की डिमांड स्थानीय बाजारों में काफी बताया जाता है.

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