लाइव खगड़िया : होली के अवसर पर जिले के परबत्ता प्रखंड के कबेला निवासी कवि बाल्मिकि वत्स के द्वारा एक रचना प्रेषित की गई है. एक नजर होली पर आधारित उनकी कविता पर…
हम तेरे आभारी होली
आई रंग रंगीली होली
कितनी छैल छबीली होली ,
मोहक सुखद सुहानी होली,
जन – जन को हर्षाती होली ,
हम तेरे आभारी होली ।
दिलवालों को बहुत पसंद,
अदभुत हैं इसका आनंद,
दिल तभी मचल है जाता
मास फागुन जब फाग गाता
औरतों की अजीब उमंग
खेलेगी अब रंगारंग
रंग गुलाल से भरी झोली
कितनी खुशियाँ लाई होली
हम तेरे आभारी होली।
बूढों की है गजब की शान
होली देती मृतक में भी जान
मुट्ठी भर कर चले गुलाल
तनिक देर में गाल हुई लाल
गजब ढाल दी भोला – भोली
लहक उठी गरीबों की टोली
मनभावनी दिवानी होली
आई रंग – रंगीली होली
हम तेरे आभारी होली।
बच्चे देखी औरों की पिचकारी
रोक न सकी अपनी किलकारी
कहती, बस माँ ला दे पिचकाली
मैं भी खेलूँ, लंगों की गोली
बेबी माँ गद् गद् हो बोली
कब हुआ तु इतना जी भोली
पर्श खोल, दे रुप्ये बोली
तुरंत खरीद ला रंगो की झोली
मैं भी खेलूँ ,तू भी खेलो
सबको भाती दिवानी होली
आई रंग रंगीली होली
हम तेरे आभारी होली ।
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