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इस युवा ने आपदा को बदला अवसर में, सैकड़ों हाथों को दे रहे काम

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लाइव खगड़िया : कोरोना संकट काल में लॉकडाउन के बीच हर व्यवसाय पर कमोबेस विपरित प्रभाव पड़ा है. कोरोना काल में आई परिस्थितियों ने लोगों को बहुत कुछ सिखाया है. इस दौरान पीएम मोदी ने देश के लोगों को आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी और आपदा को अवसर में बदलने का सुझाव भी दिया. कारोना संकट काल में पीएम की बातों से प्रभावित होकर जिले के परबत्ता प्रखंड के कन्हैयाचक के एक युवा श्रवण कुमार राय कुछ ऐसा ही कर गये हैं. उन्होंने ना सिर्फ आपदा को अवसर में बदला है बल्कि वैश्विक महामारी काल में अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को भी बखूबी अदा कर रहे है. साथ ही अब वे अंग प्रद्रेश के सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढाने की जिम्मेदारी भी उठा ली हैं.

दरअसल श्री कुमार मार्केटिंग एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर श्रवण कुमार राय एलईडी बल्ब निर्माण से जुड़े हैं. इस बीच कोरोना संकट काल में लॉकडाउन के बीच व्यवसाय पर पड़ने वाले प्रभाव और बाजार में मास्क की किल्लत को परखते हुए उन्होंने स्थानीय स्तर पर मास्क निर्माण करने का फैसला लिया. ताकि लोगों को सस्ते दर पर अच्छी गुणवत्ता का मास्क आसानी से उपलब्ध कराया जा सके. मास्क निर्माण के लिए उन्होंने प्रखंड के विभिन्न पंचायतों के 300 से अधिक प्रशिक्षित सिलाई-कटाई करने वाले महिला व पुरूष से संपर्क साधा और मास्क निर्माण कार्य को गति मिल गई. साथ ही विकट परिस्थिति में उन सैकड़ों लोगों के हाथों को काम भी मिल गया.

मिली जानकारी के अनुसार हमारा परबत्ता ग्रुप के सहयोग से अबतक 4 लाख 25 हजार मास्क का निर्माण कर उसे जिले के 65 पंचायतों के मुखिया को वितरण के लिए दिया जा चुका है. इस बीच कामगारों के बीच 16 लाख की राशि पारिश्रमिक के रूप में वितरित किया जा चुका है. बहरहाल ग्रुप के द्वारा N95 स्टाइल का तीन स्तरीय खादी हर्बल मास्क का निर्माण शुरू कर दिया गया है. जिसका ऑनलाइन सेल के के लिए आमाजोन व फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों से संपर्क साधा गया है.

मास्क तैयार करने के सिलसिला को जारी रखते हुए अब श्री कुमार मार्केंटिंग एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर मंजूषा कला को भी आगे बढाने का निर्णय लिया है. इस कड़ी में भागलपुर के शाहकुंड के अनुकृति आर्ट के सहयोग से स्थानीय स्तर पर तैयार मास्क पर मंजूषा कला को उखेरा जा रहा है. बताया जाता है कि इस कला का गुर सिखने के लिए स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. जिससे मंजूषा कला के माध्यम से भी लोगों को आत्मनिर्भर बना मुहिम में एक नया अध्याय को जोड़ा जा सके. मुहिम को गति प्रदान करने में श्रवण को सदय कुमार, सौरभ कुमार, दिलीप कुमार, उदय कुमार, मोहम्मद आजाद, जावेद, नंदनी देवी, डोली मिश्रा आदि का भरपूर सहयोग मिल रहा है.


मंजूषा कला को जान लें

मंजूषा चित्र कला अंग प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर है. जो अंग क्षेत्र के लोकपर्व बिहुला-विषहरी पर आधारित है. जो पौराणिक काल से चली आ रही है. मंजूषा कला को विश्व का प्रथम कथा आधारित चित्र कला भी माना जाता है. इस कला में तीन रंगा हरा, गुलाबी व पीला का प्रयोग होता है. इसे अंगिका का चित्रकला भी कहा जाता है. मंजूषा कला में सांप की आकृति का भी प्रमुखता से उपयोग होता है.

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