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अखंड सौभाग्य के लिए किया जाने वाला व्रत ‘तीज’ सोमवार को,इसी दिन चौरचन भी




लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : अखंड सौभाग्य की कामना के लिए किया जाने वाला व्रत हरितालिका तीज इस वर्ष 2 सितंबर क़ो है. भाद्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि एवं हस्तनक्षत्र तीज व्रत का उपवास रखा जाता है. जिसमें महिलाएं पति के सुख- सौभाग्य, निरोग्यता के लिए माता गौरी की पूजा करती हैं. पंडित अजय कांत ठाकुर,  पंडित कृष्णकांत झा बताते हैं कि इस वर्ष  2 सितंबर को सुबह से लेकर शाम के 6:46 मिनट के बीच पूजा श्रेयकर होगा. इस वर्ष इसी दिन चतुर्थी चंद्र पूजन (चौरचन) भी है. ऐसे में दोनों पर्वों को लेकर घर-घर में पूजा की तैयारी चल रही है. इस बीच तीज एवं चौरचन पर्व को लेकर बाजारो में भी काफी भीड़ देखी जाने लगी है. व्रत के पूर्व रविवार को महिलाएं गंगा स्नान कर हाथों में मेंहदी रचेगी.

तिथि और शुभ मुहूर्त 

तीज व्रत भाद्र पद के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है. जो गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले होता है. इस वर्ष पूजा करने की तिथि 2 सितंबर, सोमवार को है. इस दिन सूर्योदय के बाद से शाम के 6:46 मिनट के बीच पूजा श्रेयकर होगा.

सुहागिनों का है पर्व

हरियाली तीज, कजरी तीज और करवा चौथ की तरह तीज सुहागिनों का ही एक व्रत है. जिसे महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु के लिए पूरी निष्ठा के साथ करती है. ऐसी मान्यता है कि भगवान शंकर को पाने के लिए माता पार्वती ने भी इसी व्रत को किया था और इस दौरान उन्होंने अन्न और जल तक ग्रहण नहीं किया था. इसलिए आज भी महिलाएं इस व्रत के दौरान निर्जला रहकर भगवान शिव, माता पर्वती और गणेश जी की पूजा करतीं हैं.

पूजन विधि

प्रात: उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर एक चौकी पर रंगीन वस्त्रों के आसन बिछाकर शिव और पार्वती की मूर्तियों को स्थापित करें और इस व्रत का पालन करने का संकल्प लें। संकल्प करते समय अपने समस्त पापों के विनाश की प्रार्थना करते हुए कुल, कुटुम्ब एवं पुत्र पौत्रादि के कल्याण की कामना करें. आरंभ में श्री गणेश का विधिवत पूजन करना चाहिए. गणेश पूजन के पश्चात् शिव-पार्वती का आवाहन, आसन, पाद्य, अघ्र्य, आचमनी, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, दक्षिणा तथा यथाशक्ति आभूषण आदि से  पूजन श्रेयकर माना जाता है.




पूजन के पश्चात यह करें

पूजन की समाप्ति पर पुष्पांजलि चढ़ाकर आरती, प्रदक्षिणा और प्रणाम करें और फिर कथा का श्रवण करें. कथा के अंत में बांस की टोकरी या डलिया में मिष्ठान्न, वस्त्र, पकवान, सौभाग्य की सामग्री, दक्षिणा आदि रखकर आचार्य पुरोहित को दान करें. पूरे दिन और रात में जागरण करें और यथाशक्ति ओम नम: शिवाय का जप करते रहें. दूसरे दिन और प्रात: भगवान शिव-पार्वती का व्रत का पारण करना किया जाता है. 03 सितंबर दिन मंगलवार के भोर में चित्रा नक्षत्र का पारण सौभाग्य-वृद्धि में सहायक माना गया है.

कहती है व्रत करने वाली महिलाएं

सुधा कुमारी, कुमिता , बबली, नूतन, पुष्पांजली आदि बताती हैं कि हरतालिका तीज सुहागिन महिला श्रद्धापूर्वक के साथ नियम व निष्ठा के साथ करतीं हैं. व्रत के दौरान निर्जला उपवास रखा जाता है. पूजा के दौरान सुहागिन नए कपडे के साथ श्रृंगारित होकर अपने पति की दीर्घायु के लिए मां पार्वती की पूजा करती हैं. पूजन के साथ अखंड दीप रात भर जलती रहती है. अखंड दीप प्रज्जवल का विशेष महत्व है और रात्रि में समूह बनाकर महिलाएं जागरण करती हैं. जिसकी तैयारी चल रही है.

लोक पर्व चौरचन भी सोमवार को ही

चौरचन पर्व भी इस वर्ष 2 सितंबर सोमवार की संध्या 6: 46 के बाद मनाया जाएगा. जिसकी तैयारियां भी चरम पर है. पूजा के दौरन संध्या मे आगंन या छत पर रंग बिरंगे अरिपन बनाया जाता है. प्रसाद के रूप में उसके उपर छोटे-छोटे मिट्टी के बर्तनों में दही, पकवान सहित विभिन्न तरह की मिठाईयां पश्चिम दिशा की ओर रखकर व्रती बारी-बारी से हाथ में दहीं, पकवान की डाली रख कर विभिन्न मन्त्रौउच्चारण करतीं हैं. वहीं चन्द्रमा को अर्घ्य दिया जाता है.

दूध एवं गंगाजल से दिया जाता अर्ध्य

लोक पर्व चौरचन सदियों से चली आ एक रही परंपरा है जो आज भी लोगों ने बरकरार रखा है. चन्द्रमा को अर्घ्य  देने के  बाद ही लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं. इस दौरान प्रत्येक घरों में एक महिलाएं निराधार उपवास में रहती हैं और संध्या में चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रती पानी ग्रहण करती हैं. जबकि प्रातःकाल उपवास का निस्तार होता है. मान्यता है कि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को यह व्रत करने से रोग, व्याधि आदि से मुक्ति मिलती है.


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