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परबत्ता

मुंगेर में गरजा ‘राजधानी एक्सप्रेस’, खगड़िया का घोड़ा फिर बना रफ्तार का बेताज बादशाह

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लाइव खगड़िया : मुंगेर के मैदान में आयोजित घुड़दौड़ प्रतियोगिता में एक बार फिर खगड़िया जिला के परबत्ता के माधवपुर का परचम लहराया है। माधवपुर पंचायत निवासी कटिमन सिंह के चर्चित घोड़े ‘राजधानी एक्सप्रेस’ ने अपनी बिजली जैसी रफ्तार से प्रतिद्वंदियों को पछाड़ते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। इस जीत के साथ ही इस अनुभवी घोड़े ने अपने करियर की 30 से अधिक शील्ड जीतने का नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

मैदान में उतरते ही दिखा ‘राजधानी’ का जलवा

​17 वर्षीय ‘राजधानी एक्सप्रेस’ की रफ्तार और अनुशासन का आलम यह था कि जैसे ही दौड़ शुरू हुई, अन्य घोड़े उसके पीछे धूल फांकते नजर आए। निर्णायकों और दर्शकों के मुताबिक, इसकी संतुलित चाल और अंतिम समय में दिखाई गई फुर्ती ने सभी को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।

​”राजधानी एक्सप्रेस की ताकत और फुर्ती का कोई मुकाबला नहीं है। यह सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि हमारी मेहनत और अनुशासन का प्रतीक है।”

कटिमन सिंह, घोड़े के मालिक

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अनोखी विशेषता: रेस से पहले खुद को करता है ‘तैयार’

इस घोड़े से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प बात सामने आई है। कटिमन सिंह बताते हैं कि ‘राजधानी एक्सप्रेस’ को प्रतियोगिता का पूर्वाभास हो जाता है। रेस से दो-तीन दिन पहले ही यह खुद अपना आहार कम कर देता है, मानो किसी बड़े मिशन के लिए खुद को हल्का और फुर्तीला बना रहा हो।

बाबू साहब और राजधानी की ‘विनिंग जोड़ी’

राजधानी एक्सप्रेस की लगाम कटिमन सिंह के पुत्र बाबू साहब के हाथों में होती है। मैदान में इन दोनों की केमिस्ट्री जीत की गारंटी मानी जाती है। मुंगेर की इस रेस में भी बाबू साहब के सटीक तालमेल ने राजधानी को नंबर-1 की कुर्सी तक पहुंचाया।

विरासत और परंपरा का प्रतीक

सामाजिक कार्यकर्ता लाल रतन सिंह ने घोड़े की तारीफ करते हुए इसे राजपूती परंपरा का गौरव बताया। उन्होंने कहा:

  • ऐतिहासिक संदर्भ: जैसे महाराणा प्रताप का ‘चेतक’ इतिहास में अमर है, वैसे ही ‘राजधानी एक्सप्रेस’ अपनी रफ्तार से आज के दौर में नया इतिहास रच रहा है।
  • अनुशासन: इसकी रफ्तार के आगे बड़े-बड़े सूरमाओं के छक्के छूट जाते हैं।
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