लाइव खगड़िया: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित ADEO की परीक्षा में शुक्रवार को समस्तीपुर जिले के दो केंद्रों पर नकल के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने कान के भीतर सूक्ष्म ब्लूटूथ डिवाइस लगाकर चोरी कर रहे दो अभ्यर्थियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। जांच में इस गिरोह के तार खगड़िया जिले से जुड़ते नजर आ रहे हैं।
कान के अंदर छिपा था ब्लूटूथ, डॉक्टर की मदद से निकाला गया
पकड़े गए आरोपियों में एक उत्तर प्रदेश के वाराणसी का अरविंद कुमार राय है, जो समस्तीपुर जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कृष्णा हाई स्कूल में परीक्षा दे रहा था। वीक्षक को उसकी संदिग्ध गतिविधियों पर शक हुआ, जिसके बाद तलाशी ली गई। अरविंद ने स्वीकार किया कि उसने कान के भीतर छोटा ब्लूटूथ डिवाइस छिपा रखा है, जिसे बाद में सदर अस्पताल के डॉक्टरों की मदद से बाहर निकाला गया।
वहीं, दूसरी पाली में नगर थाना स्थित आरएसबी इंटर स्कूल से बेगूसराय के तेघड़ा निवासी सत्यजीत कुमार को इसी तकनीक के साथ पकड़ा गया। दोनों के पास से ब्लूटूथ रिसीवर और सूक्ष्म कान डिवाइस बरामद किए गए हैं।
खगड़िया से जुड़ा है ‘नकल’ का कनेक्शन
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार सत्यजीत कुमार ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि उसे यह डिवाइस खगड़िया जिले के बेलदौर के एक व्यक्ति ने उपलब्ध कराया था। डिवाइस को परीक्षा से ठीक पहले एक खंडहर में सौंपा गया था। पुलिस अब खगड़िया के उस सप्लायर की तलाश में छापेमारी कर रही है। गौरतलब है कि साल 2023 में भी खगड़िया के राजन नामक व्यक्ति को इसी तरह के उपकरण सप्लाई करने के आरोप में पकड़ा गया था।
6 लाख में होती थी ‘सेटिंग’, दिल्ली से आता था सामान
पुलिस जांच में इस शातिर गिरोह की ‘मोडस ऑपरेंडी’ (काम करने का तरीका) का भी खुलासा हुआ है:
- डिवाइस का खेल: दिल्ली से 3-5 हजार में खरीदे गए डिवाइस पटना पहुंचते ही 10 हजार के हो जाते थे।
- सौदा: अभ्यर्थियों से डील के वक्त 60 हजार रुपये और ओरिजिनल सर्टिफिकेट ले लिए जाते थे। परीक्षा पास होने के बाद 5 से 6 लाख रुपये की डिमांड की जाती थी।
- भरोसा: माफिया अभ्यर्थियों को सिस्टम में सेटिंग होने का झांसा देकर बेखौफ नकल करने का भरोसा दिलाते थे।
कड़ी कार्रवाई की तैयारी
दोनों अभ्यर्थियों के खिलाफ संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब गिरफ्तार अभ्यर्थियों के मोबाइल कॉल डिटेल (CDR) खंगाल रही है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और कोचिंग संस्थानों की भूमिका का पता लगाया जा सके। नियम के अनुसार, पकड़े गए इन अभ्यर्थियों पर आगामी 5 साल के लिए परीक्षा देने पर प्रतिबंध लग सकता है।
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