लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम् मिशन” अब खगड़िया जिले की ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के लिए सक्रिय हो गया है। देश की प्राचीन हस्तलिखित संपदा को डिजिटल रूप देने की इस पहल के तहत जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी घनश्याम कुमार ने परबत्ता प्रखंड का दौरा कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को संरक्षित किया।
माधवपुर पुस्तकालय में मिलीं सदियों पुरानी पांडुलिपियां
अभियान के दौरान पदाधिकारी माधवपुर स्थित ऐतिहासिक जन पुस्तकालय पहुंचे। यहाँ उन्होंने सदियों पुरानी महाभारत की हस्तलिखित चौपाइयों का अवलोकन किया। इन दुर्लभ पांडुलिपियों की प्राचीनता और संरक्षण देख वे काफी प्रभावित हुए। उन्होंने तत्काल इन दस्तावेजों को ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ ऐप पर अपलोड कर इनके डिजिटल संरक्षण की प्रक्रिया शुरू की।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता लाल रतन सिंह ने पुस्तकालय की जर्जर स्थिति पर चिंता जताते हुए इसके जीर्णोद्धार की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस अनमोल धरोहर की मरम्मत नहीं हुई, तो क्षेत्र की यह अनमोल विरासत नष्ट हो सकती है।
स्वतंत्रता सेनानी की जेल से लिखी ऐतिहासिक चिट्ठी हुई डिजिटल
पदाधिकारी ने परबत्ता निवासी स्वतंत्रता सेनानी द्वारिका दास के परिजनों से भी मुलाकात की। ज्ञात हो कि द्वारिका दास को स्वतंत्रता की 25वीं वर्षगांठ पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था।
निरीक्षण के दौरान उनके परिजनों ने 26 जून 1943 को हजारीबाग सेंट्रल जेल से लिखी गई एक भावुक चिट्ठी दिखाई, जिसे द्वारिका दास ने अपने भाइयों को लिखा था। इस ऐतिहासिक पत्र को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया ताकि भावी पीढ़ी देश के बलिदानियों के संघर्ष को जान सके। इसके अतिरिक्त, खजरैठा निवासी श्रीबाबू गोपाल राय के परिजनों के पास सुरक्षित 1922 ईस्वी के पोस्टकार्ड व अन्य दस्तावेजों को भी संरक्षित करने की बात कही गई।
प्रमुख मांगें और अपील
- आम जन से अपील: जिला पदाधिकारी ने अपील की है कि यदि किसी के घर, मंदिर, मठ या पुस्तकालय में 75 वर्ष से पुरानी कोई भी पांडुलिपि उपलब्ध है, तो उसकी सूचना अवश्य दें ताकि उसे डिजिटल लाइब्रेरी का हिस्सा बनाया जा सके।
- उत्खनन की मांग: मौके पर मौजूद जिप सदस्य जयप्रकाश यादव ने गोगरी प्रखंड के चन्दवाडीह की सभ्यता और लोकगाथा का हवाला देते हुए वहां नियमानुसार सरकारी उत्खनन कराने की मांग रखी।
उपस्थिति:
इस दौरान विनय कुमार, वंशिकाश्री, अमित कुमार, जयराम दास, धर्मेंद्र कुमार पप्पू सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
मिशन का लक्ष्य: देश भर में 1 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, संरक्षण और डिजिटल भंडारण करना है, ताकि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को अक्षुण्ण रखा जा सके।
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