लाइव खगड़िया : तमिलनाडु के बहुचर्चित सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में मदुरै की एक विशेष अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। करीब 5 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद, अदालत ने पिता-पुत्र की पुलिस हिरासत में हुई बर्बर हत्या के जुर्म में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई है।
फैसले की मुख्य बातें:
- ऐतिहासिक दंड: फर्स्ट एडिशनल सेशंस जज जी. मुथुकुमारन ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभतम से दुर्लभ) श्रेणी में रखा।
- भारी जुर्माना: अदालत ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कुल ₹1.40 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है, जिसे पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर दिया जाएगा।
- अदालत की टिप्पणी: न्यायाधीश ने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों पर जनता की सुरक्षा का दायित्व था, उन्होंने ही ऐसा जघन्य अपराध किया जिसने समाज की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है।
मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्य रहे निर्णायक
अदालत ने बचाव पक्ष के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि मौत प्राकृतिक कारणों या पहले से मौजूद बीमारी की वजह से हुई। फॉरेंसिक साक्ष्यों ने पुष्टि की कि जयराज और उनके बेटे बेनिक्स की मौत पुलिस हिरासत में दी गई गंभीर चोटों और बर्बर मारपीट का सीधा परिणाम थी। कोर्ट ने हत्या के साथ-साथ सबूत मिटाने के आरोपों को भी पूरी तरह साबित माना।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना जून 2020 (कोरोनाकाल) की है। लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए निर्धारित समय के बाद दुकान खुली रखने के आरोप में पुलिस ने जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को हिरासत में लिया था।
- बर्बरता: आरोप था कि थाने में दोनों के साथ अमानवीय व्यवहार और बेदर्दी से मारपीट की गई, जिसके बाद अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।
- CBI जांच: इस घटना के बाद देशव्यापी आक्रोश फैल गया था। मद्रास हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान लेने के बाद मामला CBI को सौंपा गया।
- विस्तृत जांच: CBI ने 2000 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की और 100 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए, जिसके आधार पर यह ऐतिहासिक न्याय सुनिश्चित हो सका।
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