लाइव खगड़िया : बेगूसराय जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र के औगान गांव का एक होनहार छात्र, जिसका सपना डॉक्टर बनना था, आज अपनी जिंदगी के सबसे काले दौर से गुजर रहा है। यह कहानी है आयुष चौधरी की, जिसने एक के बाद एक ऐसी गलतियाँ की कि पूरा परिवार ही बिखर गया।
मंजिल थी ‘डॉक्टर’ बनना, पर राह भटक गई
आयुष पढ़ने में बेहद तेज था। साल 2015 में उसने फर्स्ट डिवीजन से इंटर पास किया। पिता राजेश चौधरी का सपना था कि बेटा डॉक्टर बने, इसलिए उन्होंने भारी उम्मीदों के साथ उसका दाखिला विशाखापत्तनम के एक बड़े संस्थान में कराया। पिता को भरोसा था कि आयुष NEET पास कर लेगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
प्यार का ‘महंगा’ जुनून
विशाखापत्तनम में आयुष को यूपी की रहने वाली एक एयर होस्टेस से प्यार हो गया। प्यार का जुनून ऐसा चढ़ा कि आयुष ने पढ़ाई छोड़ दी और बेतहाशा पैसे खर्च करने लगा। उसने देवघर में शादी भी की, लेकिन उसकी बुरी आदतों (गलत संगत और नशा) ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।
जब जमीन और रिश्ते दोनों हाथ से निकल गए
- 18 बीघा जमीन स्वाहा: अपनी अय्याशियों और नशे की लत को पूरा करने के लिए आयुष ने एक-एक कर पुश्तैनी 18 बीघा जमीन बेच डाली।
- पिता की खुदकुशी: बेटे की इन करतूतों से दुखी होकर पिता राजेश चौधरी ने 2017 में आत्महत्या कर ली।
- रिश्तों में दरार: जमीन बेचने की आदतों से तंग आकर पत्नी ने नाता तोड़ लिया। साल 2021 में जब वह वापस लौटा, तो छोटे भाई ने भी उसे घर में रखने से मना कर दिया।
नया मोड़: अब ‘किडनी कांड’ की चर्चा
आजकल सोशल मीडिया पर आयुष की एक नई कहानी वायरल है। चर्चा है कि आर्थिक तंगी और कॉलेज की फीस चुकाने के नाम पर वह अपनी किडनी बेच दी है। कानपुर में 30 मार्च को किडनी की खरीद-फरोख्त का मामला उजागर हुआ था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आयुष नौ लाख रुपये में अपनी किडनी बेचने को तैयार हुआ था। उसने पुलिस को बताया है कि ऑपरेशन होने के बाद खाते में 3.50 लाख रुपये ही दिए।
एक सूना घर और इंतजार करती मां
आयुष की मां रीता देवी ने उसे बहुत समझाया, लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी। आज हालात ये हैं कि आयुष का कोई अता-पता नहीं है और उसकी मां भी पिछले 15-20 दिनों से घर पर नहीं हैं। घर में ताला लटका है—एक जीता-जागता परिवार सिर्फ एक युवक की गलत जिद की वजह से इतिहास बनकर रह गया है।






