लाइव खगड़िया : राजस्थान पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए जिले के गोगरी थाना क्षेत्र के बौरना निवासी शातिर ठग कुमार सानू उर्फ दीपक सिंह को नवगछिया के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया है। जब पुलिस पहुँची, तो जनाब अपनी पत्नी के साथ होटल में अपनी ‘सफलता’ का जश्न मना रहे थे, लेकिन पुलिस ने उनके सारे अरमानों पर पानी फेर दिया।
ठगी का ‘मास्टर प्लान’: ओएसिस एंटरप्राइजेज
दीपक सिंह कोई साधारण ठग ही नहीं, बल्कि तकनीक और मार्केटिंग का माहिर खिलाड़ी था। उसने राजस्थान के कोटा में ‘ओएसिस एंटरप्राइजेज’ नाम की एक फर्जी कंपनी खोली और अखबारों में लुभावने विज्ञापन छपवाए।
- झांसा: घर बैठे मोती के हार बनाने और स्वेटर बुनने का काम।
- दस्तावेज: अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी आधार कार्ड और ई-श्रम कार्ड का इस्तेमाल किया।
- नेटवर्क: उसने ‘चेन मार्केटिंग’ का सहारा लिया। हर नए सदस्य को जोड़ने पर ₹500 का कमीशन ऑफर किया गया।
- वसूली: सिक्योरिटी के नाम पर हर बेरोजगार युवा और महिला से ₹2500 वसूले गए।
रातों-रात दफ्तर गायब, करोड़ों की चपत
कहा जाता है कि करीब 8500 लोगों को अपने जाल में फंसाकर दीपक ने ₹2 करोड़ से अधिक की ठगी की। जैसे ही उसके पास मोटी रकम इकट्ठा हुई, वह रातों-रात दफ्तर बंद कर फरार हो गया। कोटा के अनंतपुरा थाने में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी।
डिजिटल पदचिह्नों (Digital Footprints) ने पहुँचाया सलाखों के पीछे
राजस्थान पुलिस की टीम ने कांस्टेबल फरसाराम की मदद से टेक्निकल जांच और डिजिटल डेटा का विश्लेषण किया। पुलिस ने पटना से भागलपुर तक उसकी गुप्त निगरानी की और आखिरकार नवगछिया के एक होटल में छापेमारी कर उसे धर दबोचा।
बरामदगी की सूची:
- नकद: ₹1,88,500
- वारदात में इस्तेमाल लाल रंग की कार
- फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज
सिर्फ राजस्थान नहीं, आधा भारत था निशाने पर!
जांच में खुलासा हुआ कि यह शातिर ठग सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं था। उसने बिहार (दरभंगा), झारखंड (रांची), छत्तीसगढ़ (दुर्ग), उत्तर प्रदेश (सहारनपुर) और मध्य प्रदेश (इंदौर) जैसे कई राज्यों में ठगी का जाल फैला रखा था। राजस्थान पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए 50 हजार का ईनाम भी रखा था।
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