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स्वर्ण देवी के नाम से विख्यात हैं इस मंदिर की मां दुर्गा

लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : जिले के परबत्ता प्रखंड के नयागांव सतखुट्टी की माँ दुर्गा स्वर्ण देवी के नाम से विख्यात हैं. बताया जाता है कि 18वीं सदी के द्वितीय दशक में सप्तमी वंश के मेहरबान सिंह को माता ने सपने में मंदिर स्थापित कर पूजा प्रारंभ को कहा था. उस वक्त यह मंदिर वर्तमान स्थल से दूर सतखुट्टी टोले में स्थित था. जो कि बाद में गंगा नदी के कटाव से विस्थापित हो गया. कहा जाता है कि टोले की पूरी आबादी को कटाव से विस्थापित करने के बाद गंगा नदी मंदिर तक पहुँचकर अपने मूल स्थान की ओर लौट गई. बाद में जहां मंदिर स्थापित था वह स्थान एक टीले के रूप में उभरकर सामने आया.

सबकी मन्नतें पूर्ण करती हैं स्वर्ण देवी

वर्ष 1979 में पुराने मंदिर के मिट्टी को एकत्रित कर वर्तमान स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया. ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा के इस दरबार से आज तक कोई खाली हाथ नहीं लौटा है. भक्तजन यहां चढ़ावा में सोने का आभूषण देते हैं. यहां शारदीय नवरात्रा में संध्या के समय भव्य आरती का आयोजन होता है. पूर्व जिला परिषद सदस्य शैलेन्द्र कुमार शैलेश ने बताया कि शारदीय नवरात्रा के प्रथम दिन मंदिर से गाजे-बाजे के साथ कलश यात्रा निकलती है. पुरानी परंपरा के तहत पूर्ण संकल्प के साथ मंदिर के मुख्य पुरोहित डब्लू मिश्र कलश में गंगा जल भरकर जब मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं तो सैकड़ो की संख्या में मुख्य पंडा के चरणों में जल चढ़ाने को लेकर होड़ मच जाती है. इस मंदिर में चतुर्भुज दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण सिद्ध शिल्पकार के बजाय गांव के ही एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा किया जाता है. प्रचलित मान्यता के अनुसार नयागांव के कार्तिक स्वर्णकार के पूर्वजों को मां दुर्गा ने स्वप्न दिया था कि मेरी प्रतिमा प्रत्येक वर्ष तुम या तुम्हारे परिवार का कोई सदस्य बनाएगा. जिसपर स्वर्णकार ने कहा कि हे मां मुझे तो मूर्ति बनाना नहीं आता है. इसके अलावा उनके वंशज यह काम करेंगे या नहीं यह भी वो नहीं जानता है. ऐसे में मां ने स्वर्णकार से कहा कि तुम केवल मिट्टी रखते जाओ प्रतिमा खुद बन जाएगी. इतना कहते ही माता अन्तरध्यान हो गई. तब से लेकर आज तक बिना किसी प्रशिक्षण के इस परिवार के लोगों द्वारा प्रतिमा निर्माण किया जा रहा है. गांव तट पर अवस्थित मंदिर में हजारों एलइडी बल्व से सजाया जाता है. जिससे रात्रि में प्रकाश की एक मनमोहक छटा देखने को मिलती हैं. इस मंदिर में नवरात्रा में भक्तों का जन सैलाब उमड़ पड़ता है. नयागाँव सतखुट्टी की माँ दुर्गा सिद्ध पीठ के रूप में भी जानी जाती है.

निर्जला उपवास में रहती हैं दर्जनों महिलाएं

ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक मंदिर परिसर में कष्टी भवन एवं कुमारिका भवन का निर्माण किया गया है. कष्टी भवन में नवरात्र के मौके पर निर्जला उपवास करने वाली दर्जनों महिला उसी भवन में नौ दिनों तक रहकर मां दुर्गा की आराधना करती हैं एवं कुमारिका भवन में नौ दिनों तक कुंवारी कन्याओं को भोजन करवाया जाता है.

नौबतखाना से बजती है शहनाई

मंदिर के मुख्य द्वार के समीप नौबतखाना का निर्माण किया गया है. शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना के साथ ही सुबह शाम नौबतखाना से शहनाई, ढ़ोल जैसे वाद्य यंत्र की आवाज गुंजने लगती है. इसके लिए एक टीम की तैनाती होती है जो 9 दिनों तक सुबह-शाम नौबतखाना से वाद्ययंत्र बजाने का कार्य करते हैं.

दंड प्रणायाम देते हुए पहुंचते हैं भक्तगण

मन्नतें पूर्ण होनें पर दंड प्रणायाम देते हुए श्रद्धालु स्वर्ण देवी दुर्गा मंदिर के दरबार में पहुंचते हैं. शारदीय नवरात्र में अष्टमी के दिन सीढ़ी गंगा घाट नयागांव से दंड प्रणायाम देकर मां के दरबार में पहुंचने वाले भक्तों की भीड़ देखने को मिलता है. इस अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु मां की दरबार में पहुंचते हैं. बताया जाता है कि सचमुच में मां की महिमा अपरंपार है.

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