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ईंट भट्ठों से आम की फसल को खतरा, ऐसे करें बचाव

लाइव खगड़िया : आम के फसल में एक बीमारी बहुत ज्यादा देखने को मिल रही है. जो किसानों की परेशानी को बढ़ा रहा है. इस बीमारी को कई नामों से जाना जाता है. जिसमें काला टीका रोग, कोइलिया रोग अथवा ब्लैक टिप ऑफ मैंगो जैसे नाम शामिल हैं. यह रोग ईट भट्ठे के आसपास के बागों में मुख्यतः देखा जाता है. आम के फल का आकार थोड़ा बड़ा होने पर इस बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं. शुरूआत में आम के निचले हिस्से पर पहले हल्के काले निशान दिखाई देता है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है और काला पड़ जाता है. जो कि बाद में फल के निचले हिस्से में फैल जाता है और फल का वह भाग कड़ा हो जाता है.

कुछ प्रबेधों (दशहरी) में फल का निचला भाग पतला हो जाता है तथा ज्यादा हरा दिखता है. कभी-कभी आम का काला हो चुके हिस्से में छोटे-छोटे कीटों का प्रकोप भी देखने को मिलता है. यदि सही समय पर इसका उपचार नहीं किया गया तो आम का फल गलने लगता है और फसल की गुणवत्ता मे कमी आ जाती है. यदि देखा जाये तो यह मूल रुप से कोई बीमारी नहीं है. वास्तविकता यह है महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के कमी के कारण ऐसा होता है.

सहायक निदेशक (पौधा संरक्षण) श्याम नंदन कुमार ने बताया है कि आम के फसलों को इस विकार से रोकथाम के लिए बोरेक्स 1% या बोरेक्स 2.5 ग्राम प्रति 3 लीटर या सोलापुर 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर संध्या के समय आम के बागों पर छिड़काव करना चाहिए. आम का बाग ईंट के भट्टे के 5 से 6 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दक्षिण दिशा में लगाने से रोग को काफी हद तक कम किया जा सकता है. यदि बाग के पास ईट के भट्टे हो तो उनकी चिमनी की ऊंचाई अधिक होनी चाहिए.

दूसरी तरफ इस तरह का एक और बीमारी आम के फलों में देखने को मिल रहा है. इस बीमारी में आम फटने लगता है. जिससे किसानों को नुकसान का उठाना पड़ता है. आम का फल फटने के कई कारण हो सकते हैं. उन कारणों में से कुछ निम्न हो सकता है…

👉 बागों का उचित प्रबंध ना होना. कई बार किसान आम के बागानों का उचित प्रबंधन नहीं करते हैं. कई किसान केवल वृक्षों में मंजर आने से ले कर फलों की तुड़ाई होने तक ही बागों की देख-रेख करते हैं. कई महीनों तक सही देख-रेख नहीं होने के कारण वृक्षों को उचित पोषक तत्व नहीं मिलता है. जिसके परिणाम स्वरुप फल फटने लगता है.

👉 तापमान में बदलाव : गर्म एवं सूखे मौसम में फलों के फटने की समस्या हो सकती है. इसके साथ ही दिन एवं रात के तापमान में अधिक अंतर होना भी फलों के फटने के मुख्य कारण हो सकता है. इसके अलावा लम्बे समय तक सूखा पड़ने के बाद हुई भारी वर्षा से भी फल फटने की समस्या शुरू हो जाती है.

👉 असंतुलित मात्रा में पोषक तत्व : पोषक तत्वों की कमी या असंतुलित मात्रा में पोषक तत्वों का प्रयोग करने से भी फल फटने लगते हैं.

इस बीमारी से बचने के लिए बोरेक्स 1% या बोरेक्स 2.5 ग्राम प्रति 3 लीटर या सोलापुर 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर संध्या के समय आम के बागों पर छिड़काव किया जा सकता है.

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