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फायर ब्रांड नेता के तौर पर उभर रहे जदयू के विधायक डॉ संजीव

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लाइव खगडिया (मनीष कुमार) : जिले के परबत्ता विधानसभा क्षेत्र के जदयू विधायक डॉ संजीव कुमार अपने बिंदास अंदाज को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं. ऐसा भी नहीं है कि उनका बेवाकपन नया है. यदि यादों को झरोखे में लौटें तो विगत विधानसभा चुनाव के महीनों पूर्व उन्होंने खुद को खुले मंच से परबत्ता विधानसभा क्षेत्र का जदयू प्रत्याशी घोषित दी थी और गठबंधन की राजनीति के दौर में उन्होंने तमाम प्रयासों को धत्ता साबित करते हुए अपनी भविष्यवाणी को सच भी साबित कर दिखाया. इतना ही नहीं उन्होंने चुनाव में भी फतह हासिल की और आज वे परबत्ता विधानसभा क्षेत्र का जदयू विधायक के तौर पर प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. निश्चिय ही डॉ संजीव युवा हैं, शिक्षित है और उनकी कार्यशैली का अपना एक अलग अंदाज भी रहा है. हलांकि राजनीतिक विरोधियों पर पलटवार को लेकर भी वो चर्चाओं में बने रहते हैं. भले ही इस मामले में दो अलग-अलग राय हो सकती है. लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि मैदान चाहे जंग का रहा हो या फिर राजनीति का…विरोधियों को पस्त करने के लिए खेली गई हर बाजी आज के राजनीतिक दौर में सही ही माना जाने लगा है.





एक विधायक के तौर पर अपने क्षेत्र में या फिर सदन में अबतक वो फ्रंट लाइन में ही रहे हैं. अबतक अपने छोटे से कार्यकाल के दौरान सदन में उन्होंने टोपो लैड सहित कई अन्य मुद्दों को ना सिर्फ प्रमुखता से उठाया है बल्कि वक्त-बेवक्त उन्होंने अपनी ही सरकार को बेवाक अंदाज में आईना भी दिखाया है. सत्ता पक्ष का विधायक रहते हुए उन्होंने सदन में कोरोना काल की चर्चा करते हुए स्वीकार किया था कि एनेस्थेटिस्ट व टेक्नीशियन की कमी के कारण कोरोना के दूसरी लहर के बीच अस्पतालों में वैंटिलेटर बेकार पड़ा रह गया और जरूरतमंद मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल सका. साथ ही उन्होंने ऑक्सीजन की कमी व कालाबाजारी की बात भी भरी सदन में स्वीकार की थी. हलाकिं सत्ता पक्ष के एक विधायक के तौर पर अपनी ही सरकार की खांमियों को सार्वजनिक तौर पर उजागर करने का काम आसान भी नहीं था. लेकिन डॉ संजीव का यह अंदाज ही उन्हें औरों से अलग कर जाता है.

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हाल के दिनों में सरकार के मंत्री जीवेश मिश्रा की गाड़ी रोकने का मामला हो या फिर राजद विधायक चेतन आनंद द्वारा सदन में उठाये गए आनंद मोहन की रिहाई का मामला, दोनों ही मुद्दे पर डॉ संजीव ने बिंदास अंदाज में अपने विचारों को रखा था. जबकि सरकार के निर्देश पर शराब व शराब कारोबारियों के विरूद्ध चलाये जा रहे विशेष अभियान के साथ अन्य मादक पदार्थों पर भी सख्ती से पाबंदी लगाने की मांग को लेकर विधायक दल की बैठक में आवाज बुलंद करना डॉ संजीव के सोच को परिलक्षित करता है.




परबत्ता विधायक डॉ संजीव अपने क्षेत्र में लोगों की शिकायत पर भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ जंग भी अपने ही अंदाज में लड़ रहे हैं. इस कड़ी में वे विभिन्न कार्यालयों का समय-समय पर औचक निरीक्षण करते हैं और खामियां उजागर होने पर अपने ही अंदाज में मौके पर ही संबंधित की जमकर क्लास भी लगा देते हैं. इस दौरान सोशल साइट पर चल रहा लाइव प्रसारण ऐसे तमाम अधिकारियों व कर्मियों के लिए उनका एक संकेत भी समझा जा सकता है. बहरहाल विधायक के कार्यशैली का बिंदास अंदाज ना सिर्फ उन्हें अन्य जनप्रतिनिधियों से अलग खड़ा करता है बल्कि एक फायर ब्रांड नेता के रूप में भी वे खुद को उभार रहे हैं.




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