लाइव खगड़िया (मनीष कुमार) : दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन होने को शुभ माना जाता है. मान्यता है कि यदि दशहरे के दिन किसी भी समय नीलकंठ दिख जाए तो इससे घर में खुशहाली आती है. “नीलकंठ तुम नीले रहियो, दूध-भात का भोजन करियो…हमरी बात राम से कहियो’, इस लोकोक्ति के अनुसार नीलकंठ पक्षी को भगवान का प्रतिनिधि माना गया है. दशहरा के दिन इस पक्षी के दर्शन को शुभ और भाग्य को जगाने वाला माना जाता है. यहीं वजह है कि दशहरे के दिन हर व्यक्ति नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना चाहता है. मान्यता है कि इस दिन नीलकंठ के दर्शन होने से घर के धन-धान्य में वृद्धि होती है.
कहा जाता है कि श्रीराम ने इस पक्षी के दर्शन के बाद ही रावण पर विजय प्राप्त की थी. विजय दशमी के पर्व को जीत का पर्व भी कहा जाता है. दशहरे पर नीलकण्ठ के दर्शन की परंपरा बरसों से जुड़ी है. कहा जाता है कि लंका जीत के बाद जब भगवान राम को ब्राह्मण हत्या का पाप लगा था. ऐसे में भगवान राम ने अपने भाई लक्ष्मण के साथ मिलकर भगवान शिव की पूजा अर्चना की थी एवं ब्राह्मण हत्या के पाप से खुद को मुक्त कराया था. तब भगवान शिव नीलकंठ पक्षी के रुप में धरती पर पधारे थे. जनश्रुति और धर्मशास्त्रों के मुताबिक भगवान शंकर ही नीलकण्ठ है. इस पक्षी को पृथ्वी पर भगवान शिव का प्रतिनिधि और स्वरूप दोनों माना गया है.
नीलकंठ किसानों का सहायक पक्षी है और खेतों में कीड़े मकोड़ों को खाकर किसानों की सहायता ही करता है. लेकिन नीलकंठ पक्षी आज संकट में है. शिकारियों के अंधाधुंध शिकार करने और खेतों में कीटनाशकों के प्रयोग के कारण नीलकंठ पक्षी लुप्त होते जा रहा है. दरअसल किसानों द्वारा अपने खेतों में कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल करने और मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंगों के कारण नीलकंठ पक्षी के प्रजनन क्षमता पर असर पड़ा है.
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