लाइव खगडिया (मुकेश कुमार मिश्र) : समाज में आज भी महिलाओं का स्मशान घाट जाकर अंतिम संस्कार में भाग लेना भले हीं वर्जित हो. लेकिन धीरे-धीरे यह परंपरा टूटने लगी है और महिलाएं भी अंतिम संस्कार संपन्न करते हुए दिखने लगी है. भले ही इसका कारण कुछ रहा हो, लेकिन रूढ़ीवादी सामाजिक परंपराओं को तोड़ते हुए महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि वह हर कदम पर पुरुषों के साथ बराबार का दर्जा पाने में सक्षम है.
हलांकि अब तक बेटियों द्वारा पिता को मुखाग्नि देना का चलन सामने आया था. लेकिन शुक्रवार को एक पत्नी ने समाज के बंधन को पीछे छोड़ते हुए अपने पति का अंतिम संस्कार किया. जिले के परबत्ता प्रखंड के सियादतपुर अगुवानी पंचायत के राका गांव निवासी कृष्णानंद मिश्र काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे. इस बीच कोरोना संक्रमण काल मे उनके परिजनों ने इलाज के लिए उन्हें पटना ले गए. लेकिन उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ. जिसके बाद उन्हें पैतृक गांव राका लाया गया. जहां गुरुवार को उनका निधन हो गया.
कृष्णानंद मिस्र को कोई संतान नहीं था. परिजनों ने बताया कि मृत्यु से पूर्व उन्होंने अंतिम संस्कार पत्नी के हाथों से ही कराए जाने की इच्छा जताई थी और मौत के बाद अपने पति की इच्छा का उनकी पत्नी ने सम्मान किया और मीना देवी ने अगुवानी गंगा घाट पंहुचकर दर्जनों परिजनों की मौजूदगी मे अपने पति को मुखाग्नि दी.
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