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NDA : BJP की सभी कोशिशें गई बेकार, चारों सीटों पर होंगे JDU उम्मीदवार




लाइव खगड़िया (मनीष कुमार) : जिले में सीटों को लेकर एनडीए के दो प्रमुख घटक दल जदयू व भाजपा के बीच खींचातानी में जदयू ने बाजी मार ली है और एनडीए के घटक दलों के बीच जिले की चारों सीट जदयू कोटे में चली गई है. उधर जिला भाजपा के नेताओं द्वारा सीटों को लेकर की गई हर कवायद के बाद उन्हें मायूसी हाथ लगी है.

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उल्लेखनीय है कि जिला भाजपा की टीम की नजर खगड़िया व परबत्ता विधानसभा की सीटों पर थी. हलांकि भाजपा के लिए इन दो सीटों में से किसी एक सीट को भी अपने कोटे में लाना बहुत आसान भी नहीं दिख रहा था. गौरतलब है कि ही दोनों ही सीटें जदयू की परंपरागत सीट रही है और यहां से जदयू के दो दिग्गज लगातार जीत का परचम लहराते आ रहे है. यकीनन जदयू के दो दिग्गज नेताओं का विगत के चुनावों में प्रदर्शन भाजपा के संभावित प्रत्याशियों के उम्मीदों पर पानी फेर गया है.

खगड़िया विधानसभा की सीट पर पूर्व विधायक रणवीर यादव की पत्नी पूनम देवी यादव जदयू की टिकट पर विगत चुनाव सहित लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुकी है और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनपर एक बार फिर भरोसा जताया है. चर्चाएं है कि खगड़िया विधानसभा सीट से निवर्तमान विधायक पूनम देवी यादव के नाम पर मुहर लग गई है. हलांकि जदयू ने अाधिकारिक रूप से अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा अभी नहीं की है.उधर परबत्ता के निर्वर्तमान विधायक आर एन सिंह के द्वारा इस बार चुनाव नहीं लड़ने के ऐलान के बाद उनके पुत्र जदयू चिकित्सा प्रक्रोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ संजीव कुमार का जदयू से चुनाव लड़ने की चर्चाएं जोरों पर रही. इस बीच जिले की परबत्ता की सीट भाजपा कोटे में जाने की चर्चाओं के बीच उनके समर्थकों में छाई मायूसी एनडीए के घटक दलों के सीटों के ऐलान के साथ जश्न में बदल गया है. गौरतलब ही कि परबत्ता की सीट एनडीए के घटक दल जदयू कोटे में रही है.


उधर जिले का अलौली व बेलदौर विधानसभा की सीट भी एनडीए के जदयू कोटे में आई है. उल्लेखनीय है कि बेलदौर की सीट भी जदयू की परंपरागत सीट ही मानी जाती रही है. जहां से जदयू की टिकट पर पन्नालाल सिंह पटेल की जीत होती रही है. वे भी जदयू की टिकट पर अक्टूबर 2005, 2010 व 2015 में लगातार फतह हासिल कर जीत की हैट्रिक लगा चुके है. बात यदि अलौली विधानसभा क्षेत्र की करें तो यह सीट कभी लोजपा की परंपरागत सीट मानी जाती थी. लेकिन वर्ष 2010 के चुनाव में जदयू के रामचन्द्र सदा ने लोजपा सुप्रिमो रामविलास पासवान के भाई लोजपा प्रत्याशी पशुपति कुमार पारस को हराकर राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी थी. इसके पूर्व पशुपति कुमार पारस इस सीट से विभिन्न दलों की टिकट पर 1977, 1985, 1990, 1995, 2000 सहित वर्ष 2005 के फरवरी व अक्टूबर की चुनाव में लोजपा की टिकट पर जीत अर्जित करते रहे थे. हलांकि 2015 के चुनाव में जदयू के महागठबंधन में शामिल हो जाने के बाद अलौली की सीट राजद के कोटे में चली गई थी. जिसमें राजद प्रत्याशी चंदन राम ने एनडीए समर्थित लोजपा प्रत्याशी पशुपति कुमार पारस को मात दे दी. बहरहाल इस बार के चुनाव के वक्त बिहार में लोजपा एनडीए से अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है. ऐसे में अलौली की सीट एकबार फिर एनडीए के घटक दल जदयू कोटे में वापस चली आई है.

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