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जितिया व्रत : क्या है मान्यताएं, जानें शुभ मुहूर्त व पूजन विधि सहित सब कुछ



लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : भारतीय संस्कृति में अश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी का विशेष महत्व है. इस दिन महिलाएं संतान की दीर्घायु के लिए निराधार व्रत धारण करती हैं. तीन दिवसीय जिवित्पुत्रिका व्रत को लेकर तैयारियां जोरों पर है.

नहाय – खाय विधि

9 सितंबर को सप्तमी के दिन नहाय खाय का नियम है. इस दिन महिलाएं सुबह-सुबह उठकर गंगा स्नान करेगी और पूजा करती हैं. यदि आसपास गंगा नहीं हैं तो सामान्य स्नान कर भी पूजा का संकल्प लिया जाता हैं और अपने पितरों का स्मरण की जाती है.

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व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंडित अजय कांत ठाकुर ने बताया है कि विश्व विद्यालय पंचांग के मुताबिक इस बार आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 09 सितंबर की रात में 9 बजकर 53 मिनट पर प्रारंभ होगा और 10 सितंबर की रात 10 बजकर 55 मिनट तक रहेगा. 10 सितंबर को जिउतिया पर्व मनाया जाएगा. व्रत से एक दिन पहले सप्तमी 9 सितंबर को महिलाएं नहाय-खाए करेंगी. गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद मड़ुआ रोटी, नोनी का साग, कंदा, झिमनी आदि का सेवन करेंगी. व्रती स्नानसव भोजन के बाद पितरों की पूजा भी करेंगी.

दूसरे दिन निर्जला व्रत

व्रत के दूसरे दिन को खुर जितिया कहा जाता है. इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और अगले दिन पारण तक कुछ भी ग्रहण नहीं करतीं हैं.

तीसरे दिन पारण

व्रत के तीसरे और आखिरी दिन पारण किया जाता है. जितिया के पारण के नियम भी अलग-अलग जगहों पर भिन्न हैं. कुछ क्षेत्रों में इस दिन नोनी का साग, मड़ुआ की रोटी आदि खाई जाती है. 11 सितम्बर की सुबह सूर्योदय से लेकर दोपहर 12 बजे तक रहेगा. व्रती महिलाओं को जिउतिया व्रत के अगले दिन 11 सितंबर को 12 बजे से पहले पारण करेंगी.

पकवानों से सजेगी डाली

जिवित्पुत्रिका व्रत धारण करने वाली महिलाएं ने बताया कि व्रत के दिन दोपहर बाद अखण्ड डाला में नारियल, खीरा,बांस के पत्ते, जियल के पत्ते,पान, सुपारी, जनेऊ,कई तरह के फल एवं पकवान भर कर लाल कपड़े में बांध दिया जाता हैं. जिसके वाद व्रतधारी महिलाएं जिवित्पुत्रिका व्रत की कथा श्रवण करती हैं. व्रत का पारण करने के पूर्व घर के संतान अखण्ड डाली पर रखे लाल रंग के कपड़े को हटाती हैं. इसके बाद ही व्रतधारी जिउतिया व्रत का पारण करती हैं. पारण में व्रतधारी भात, नोनी की सब्जी, साग एवं मडुवा की रोटी ग्रहण करती हैं. 10 सितंबर को डाली भराई एवं 11 को खोला जाएगा.


कहते है पंडित

पंडित की माने तो महाअष्टमी व्रत भक्त जनो की मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं तथा घर में सुख,समृद्धि लाती है. जिउतिया की महाअष्टमी व्रत संतान की लम्बी आयु, बाधाओं से मुक्ति का प्रतीक हैं और महिलाएं श्रद्धा भक्ति के साथ निराधार उपवास करती हैं. इस दौरान मां अपने संतान की दीर्घायु के लिये कष्ट उठाती हैं और मां का आशीर्वाद सदैव संतान के साथ रहता है।

पौराणिक कथा

भारतीय संस्कृति में पर्व त्यौहार का विशेष महत्व है. सभी पर्व पौराणिक कथा से जुड़ी हुई हैं. मान्यता है कि जिमुत वाहन राजा ने गरुड़ से मुक्ति दिलाकर कई मृत पुत्रों को जीवित करवाया था. द्रोपती ने अपने पुत्र की दीर्घायु के लिए जिवित्पुत्रिका व्रत रखा था. उसके बाद से ही महिलाएं अपने संतान की दीर्घायु के अश्विनी माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी को जिवित्पुत्रिका व्रत करती आ रही हैं.

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