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STET की परीक्षा रद्द होने पर ABVP ने सरकार पर साधा निशाना, पुनर्विचार की मांग




लाइव खगड़िया : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेताओं ने माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (STET) के रद्द किए जाने पर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री व बोर्ड के अध्यक्ष से मामले पर पुनर्विचार करने की मांग किया है. इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अभाविप के नेताओ ने छात्रों व शिक्षकों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कई सवाल खड़े किए हैं.

वहीं विद्यार्थी परिषद के भरत सिंह जोशी ने कहा कि सरकार ने इस वर्ष 28 जनवरी को हुई परीक्षा को रद्द कर दिया. जिसमें 2 लाख 43 हजार 141 परीक्षार्थियों ने भाग लिया था. उधर बोर्ड ने परीक्षा के फिर से आयोजन का प्रस्ताव भेजा है. जो छात्रों के भविष्य के साथ ना सिर्फ खिलवाड़ है बल्कि छात्रों को आर्थिक ध्वंस का भी सामना करना पड़ेगा. दूसरी तरफ STET की परीक्षा पुनः कब होगी, इसके बारे में शिक्षा विभाग ने कोई अधिसूचना जारी नही किया है. जिसका असर सरकार द्वारा घोषित 34 हजार पदों पर शिक्षकों की बहाली पर भी पड़ेगा.

जबकि परिषद के जिला संयोजक कुमार शानु ने कहा है कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था भ्रष्ट तंत्र के सामने नतमस्तक हो गई है. जिसका परिणाम है कि लाखों युवाओं के भविष्य की परवाह किये बिना परीक्षा रद्द करने का आत्मघाती निर्णय लिया गया है. इस क्रम में 16 मई को अचानक बोर्ड की 4 सदस्यीय टीम ने जानकारी देते हुए परीक्षा रद्द करने की बात कही है. जबकि परीक्षा समाप्त होने के बाद बोर्ड अध्यक्ष के द्वारा यह बात साफ तौर पर कहा गया था कि ना तो कहीं पर परीक्षा का पर्चा लीक हुआ और ना ही परीक्षा में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार ही हुआ. ऐसे में फिर क्या मजबूरी रही कि बिहार बोर्ड और बिहार सरकार को अपरिहार्य कारणों से परीक्षा को रद्द करना पड़ा. साथ ही उन्होंने कहा है कि मामले में हाई कोर्ट का फैसला जब 22 मई को आना था तो इसके पहले ही परीक्षा को रद्द किया जाना कितना उचित है ! साथ ही अभाविप नेताओं ने सरकार से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा है कि यदि ऐसा नहीं होता है तो अभाविप कार्यकर्ता आंदोलन के लिए बाध्य होंगे और मामले के विरोध में 23 मई को काला दिवस मनाया जायेगा.

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